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मतदाताओं को धमकाएँ नहीं राजनीतिक दल
संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल के राजनीतिक दलों और उनके पूर्व माओवादी विद्रोहियों को आगामी माह में होने जा रहे आम चुनाव के पहले मतदाताओं को डराने धमकाने से रोकने का आग्रह किया है।

नेपाल की संविधान सभा के लिए आगामी 10 अप्रैल को चुनाव होंगे, जो देश का नया संविधान तैयार करेगी। हाल में चुनाव संबंधी हिंसा में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई तथा दर्जनों घायल हुए हैं।

नेपाल के शीर्ष राजनीतिक दलों का आरोप है कि माओवादी उनके नेताओं को अपने प्रभाव वाले तराई क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करने से रोक रहे हैं।

गुरिल्ला समूह के तौर पर मशहूर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी (सीपीएन एम) का जिक्र करते हुए संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीपीएन एम को अपने प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को चुनाव प्रचार से रोकने की कार्रवाई बंद करनी होगी।

सभी राजनीतिक दलों से चुनाव आचार संहिता पालन करने का आग्रह करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव में गड़बड़ी से इसकी वैधता नहीं रह जाएगी।

विश्लेषकों का मानना है कि हिंसा के चलते पिछले नौ वर्ष में पहली बार हो रहे चुनाव की विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी, जिसे नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने राष्ट्रीय सम्मान का मुद्दा करार दिया है। कोइराला ने कहा कि यदि हम चुनाव नहीं करा सकते तो हम विश्व बिरादरी के बीच अपनी पहचान खो बैठेंगे।

प्रधानमंत्री की नेपाली कांग्रेस पार्टी समेत प्रमुख राजनीतिक दलों ने देश के 240 वर्ष पुरानी हिंदू राजशाही के लिए उपयुक्त अवसर करार देते हुए इसे संघीय गणराज्य में बदलने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव होने वाला है जिसकी जड़ इस चुनाव में है।
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