तिब्बत की आजादी के लिए 1989 के बाद पिछले हफ्ते ल्हासा में हुई सबसे भीषण हिंसा के बाद सजा में रियायत पाने के लिए तिब्बत की राजधानी में अब तक एक सौ से ज्यादा लोगों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
चीन के मुताबिक यह हिंसा दलाई लामा के शह पर हुई है। ल्हासा में 14 मार्च को हुए दंगों में शामिल लोगों में से कुल 105 ने आत्मसमर्पण कर दिया है। हिंसा में लगभग 13 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे।
तिब्बती क्षेत्रीय सरकार ने दंगाइयों को आत्मसमर्पण करने के लिए सोमवार की आधी रात तक का समय दिया है। उसने बात मानने वालों के साथ रियायत बरतने का वादा करते हुए नाफर्मानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
क्षेत्रीय सरकार के उपाध्यक्ष बाएमा चिलेन ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सीधे तौर पर मारपीट तोड़फोड़ लूटपाट और आगजनी में शामिल थे।
सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ ने बाएमा के हवाले से कहा है कि कुछ लोगों ने लूटी रकम लौटा दी है। विरोध प्रदर्शन के हिंसक रूप ले लेने के बाद तोड़फोड़ पर उतारू भीड़ ने तीन सौ से ज्यादा जगहों पर बैंकों, सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, दुकानों पर हमले किए और आग लगा दी। क्षेत्रीय सरकार के मुताबिक 13 लोगों की पीट-पीटकर या जलाकर हत्या कर दी गई।
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