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लामा आजादी की माँग छोड़ें-चीन
मेरा हाथ नहीं-दलाई
अतंरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव के आगे झुकते हुए चीन ने मंगलवार को कहा कि दलाई लामा के साथ बातचीत के रास्ते अभी भी खुले हुए हैं। हालाँकि चीन ने कहा कि लामा को आजादी की माँग छोड़नी होगी।

गौरतलब है कि चीन तिब्बत के धार्मिक गुरु दलाई लामा को ल्हासा में स्वतंत्रता समर्थक प्रदर्शनों और शुक्रवार को व्यापक हिंसा के लिए जिम्मेदार मानता है।

चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने दोबारा प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद मंगलवार को अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दलाई लामा से बातचीत के दरवाजे अब भी खुले हैं। यदि वह तिब्बत की स्वतंत्रता की माँग छोड़ने और तिब्बत तथा ताइवान को चीन का अभिन्न हिस्सा मानने को तैयार हो जाते हैं तो उनसे बातचीत की जा सकती है।

वेन से पूछा गया था कि क्या चीन तिब्बत के मुद्दे पर बातचीत के लिए दलाई लामा को आमंत्रित करेगा। उन्होंने कहा कि हम जो कहते हैं वह करते भी हैं। हम इस बात पर नजर रख रहे हैं कि दलाई लामा क्या करते हैं। यह सब उन पर निर्भर करता है।

वेन ल्हासा में भड़की हिंसा पर बोलने वाले पहले शीर्ष चीनी नेता हैं। उन्होंने कहा दलाई लामा का यह दावा कि चीन सांस्कृतिक नरसंहार करने में लगा है, झूठ के सिवाय कुछ नहीं है। वेन ने कहा ‍‍कि हमारे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि ल्हासा में दंगे संगठित तौर पर भड़काए गए थे और यह सब दलाई लामा गुट ने किया था।

इस बीच अमेरिका की विदेशमंत्री कोंडोलिजा राइस ने सोमवार को कहा कि हमने वास्तव में चीन से आग्रह किया है कि वह दलाई लामा से बातचीत के लिए रास्ता तलाशे। दलाई लामा एक बड़े व्यक्तित्व हैं, वह कोई अलगाववादी नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि दलाई लामा के साथ बातचीत शुरू कर के ही तिब्बत मुद्दे का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है। इधर दलाई लामा की गुहार और तिब्बत में प्रदर्शनकारी बौद्ध भिक्षुओं के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करने के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय जाँच कराने की माँग उठने के बाद भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा इस दिशा में कोई कदम उठाए जाने या चर्चा करने की संभावना नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने चीन से तिब्बत मुद्दे पर संयम बरतने का आग्रह किया। चीनी राजनयिकों ने जोर देते हुए कहा है कि तिब्बत मसला उसका घरेलू मामला है और इसका अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा इसलिए कल परिषद की बैठक में इस बारे में चर्चा नहीं की गई।
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