गुलजार के गीत- 'मोरा गोरा रंग लईले, मोहे श्याम रंग दई दे...' में अभिनेत्री संकेत देती है कि उसे काला रंग पसंद है। आमतौर पर यह देखने में आया है कि पुरुषों को गोरा रंग पसंद आता है, जबकि महिलाओं को काला रंग। अब इसका कारण भी पता चल गया है।
यह शोध टोरंटो यूनिवर्सिटी के डॉ. श्योन बाऊमन ने किया है। उनका कहना है कि यह सारा खेल हमारी संस्कृति पर आधारित है। इसके अलावा सौंदर्यबोध का जहाँ तक सवाल है तो पुरुषों को ईमानदारी और नैतिकता गोरे रंग में नजर आती है, जबकि महिलाओं को श्यामवर्णी व्यक्ति संरक्षा का अहसास देता है। यह सारा अवचेतन मन में मौजूद रहता है और किसी के सामने आते ही यह उभर आता है।
पुरुषों का अवचेतन गौरवर्ण की ओर इसलिए आकर्षित होता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह शुद्धता, मासूमियत, कोमलता और अच्छाई का प्रतीक है, जबकि महिलाओं को गहरा रंग पुरुषत्व का प्रतीक लगता है। उसे यह अहसास होता है कि श्यामवर्णी व्यक्ति संरक्षा प्रदान कर सकता है।
शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि सुंदरता के संबंध में कई निष्कर्ष चेतना के स्तर पर लिए जाते हैं। इसमें पाँव की लंबाई, ऊँचाई, वजन, नाक और मुँह का आकार सभी कुछ परख लेते हैं। साथ ही अन्य शारीरिक बोध पर भी ध्यान चला जाता है। त्वचा के रंग की ओर आकर्षण को लेकर पूरा जीव विज्ञान समझना जरूरी है। (नईदुनिया)
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