पाकिस्तानी जेल में बंद भारतीय नागरिक सरबजीतसिंह को आगामी एक अप्रैल को लाहौर जेल में फाँसी दी जाएगी। सरबजीत को पाकिस्तान में 1990 में हुए चार बम धमाकों में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है।
उर्दू दैनिक डेली एक्सप्रेस में रविवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार लाहौर के कोट लखपत जेल के अधिकारियों को सरबजीत का डेथ वारंट मिल गया है। वहाँ वह पिछले 17 वर्षों से कैद है और उसे एक अप्रैल को फाँसी दी जाएगी।
सरबजीत की दया याचिका को राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने गत तीन मार्च को खारिज कर दिया था। पाकिस्तान सरबजीतसिंह को मनजीतसिंह मानता है।
सरबजीत की दया याचिका भारतीय कैदी कश्मीरसिंह की याचिका के साथ भेजी गई थी। कश्मीर को भी सजा-ए-मौत सुनाई गई थी, लेकिन उनकी दया याचिका को मुशर्रफ ने स्वीकार कर लिया था। कश्मीर को 35 वर्षों बाद जेल से रिहा कर दिया गया।
सरबजीत को लाहौर और मुल्तान में हुए बम धमाकों के सिलसिले में मौत की सजा सुनाई गई थी। इन धमाकों में करीब 14 लोग मारे गए थे। सरबजीत का परिवार पाकिस्तान के उस दावे का खंडन करता रहा है जिसमें उसे गुप्तचर बताया जाता है। सरबजीत के परिजनों का कहना है कि वह गलती से पाकिस्तानी भू-भाग में चला गया।
मुशर्रफ को भेजी गई अपनी दया याचिका में सरबजीत ने खुद को निर्दोष तथा गलत तरीके से फँसाए जाने की बात कहते हुए खुद को रिहा करने की माँग की थी।
सरबजीत की याचिका गहन विचार के बाद खारिज कर दी गई थी। उसमें कहा गया था कि उनके खिलाफ आरोप साबित हो चुके हैं और अदालत सजा-ए-मौत का फैसला सुना चुकी है। पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने भी मार्च 2006 में सरबजीत की दया याचिका खारिज कर दी थी।
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