तिब्बत में सरकारी विरोधी प्रदर्शन क्या हुए चीनी मीडिया में सन्नाटा छा गया।
चीन के टेलीविजन चैनलों से लेकर अखबार और वेबपोर्टल सभी ने तिब्बत के आन्दोलन को नहीं के बराबर कवरेज दी है। वैसे चीन में मीडिया पर सेंसरशिप नई बात नहीं है, लेकिन सोमवार को जैसे तिब्बत में हिंसक आन्दोलन शुरू हुआ मीडिया ने तिब्बत के बारे में सभी खबरों को स्किप कर दिया।
यहाँ सबसे बड़ी बात यह है कि चीन में इंटरनेट का उपयोग करने वाले दुनिया में सबसे ज्यादा है। हालाँकि कुछ न्यूज ब्लॉग सरकार की सेंसरशिप के बगैर साहसपूर्ण तरीके से ल्हासा के उग्र प्रदर्शन और उसकी तस्वीरों को आम लोगों तक पहुँचा रहे है। हालाँकि ज्यादातर ब्लॉग में चीन समर्थक समाचार ही छाए हुए है। ब्लॉग पर पश्चिमी देशों के रवैए की कड़ी आलोचना की जा रही है।
एक ब्लॉग पर लिखा गया है कि पश्चिमी देश तिब्बत के बारे में नकारात्मक प्रचार कर रहे है। यह चीन का अंदरूनी मामला है। एक ब्लॉग पर लिखा गया है कि पश्चिमी देशों और अन्य पड़ोसी देशों को चीन की संस्कृति का ज्ञान नहीं है, पश्चिमी देश क्या जाने हान 'चीनी' संस्कृति को।
एक ब्लॉग पर लिखा गया है कि तिब्बत के लोग बड़े सीधे है, लेकिन इस आन्दोलन के पीछे बाहरी शक्तियों 'दलाई लामा' का हाथ है। जानकारों का कहना है कि चीन ने कुछ ऐसी ही सेंसरशिप 1989 के थियान मैन चौक पर लोकतंत्र समर्थको पर हुई बर्बर कार्रवाई के दौरान लागू की थी।
चीन के स्थानीय अखबारों में तिब्बत नदारद है। चीन ने अघोषित रूप से कुछ पश्चिमी देशों की समाचार वेबसाइटों पर भी प्रतिबंध लगाया है। एक ब्लॉग पर लिखा गया है कि तिब्बत चीन का अभिन्न अंग है और यह बात पिछले 50 साल से पाँचवी कक्षा के चीनी बच्चों को पढ़ाई जा रही है।
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