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सुनने भर से हो सकता है पीठ दर्द
ऑफिस में लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने वाले लोगों को पीठ दर्द की शिकायत करते तो सुना होगा, लेकिन सुनी-सुनाई बातों से दूसरों को पीठ दर्द हो जाए ऐसा नहीं सुना होगा। जर्मन शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए एक शोध के नतीजे बताते हैं कि यदि आपका दोस्त, ऑफिस का सहयोगी या रिश्तेदार पीठ दर्द की बात कहता है तो उसका असर आप पर भी हो सकता है।

जर्मन शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में कहा है कि पीठ दर्द की समस्या के बारे में पढ़ने या करीबी लोगों से इसके बारे में सुनने पर भी लोग इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि जब कोई व्यक्ति दूसरे की बीमारी के बारे में सुनता है तो उसके दिमाग में भी वही सब बातें चलने लगती हैं और उसे लगता है कि उसके शरीर में दर्द है।

शरीर में किसी तरह का जख्म या कोई और परेशानी न हो तब भी दिमाग दर्द महसूस करने लगता है। 1990 में पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण के बाद वहाँ के लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं पर अध्ययन के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुँचे हैं।

बराबर था अनुपा
शोधकर्ताओं ने पाया कि इसके पहले अलग होने के बाद कई दशकों तक पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के लोगों की जेनेटिक बनावट मिलती-जुलती थी। दोनों के एकीकरण के तुरंत बाद पूर्वी जर्मनी के 69 फीसदी लोगों को पीठ दर्द की शिकायत थी।

इसके मुकाबले पश्चिमी जर्मनी में 84 फीसदी लोगों में यह समस्या थी। वर्ष 2003 तक पूर्वी जर्मनी के लोगों में पीठ दर्द की शिकायत में बढ़ोतरी देखी गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस समय तक जर्मनी के दोनों हिस्सों में बैक पेन की शिकायत करने वालों का अनुपात लगभग बराबर हो गया था।

इसलिए होता है दर्
शोधकर्ताओं का दावा है कि पीठ दर्द के करीब 15 फीसदी मामलों में शारीरिक गड़बड़ी का योगदान होता है, जबकि ज्यादातर मामलों में कोई शारीरिक गड़बड़ी नहीं पाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी जर्मनी में तेज पीठ दर्द की समस्या आम है और इसकी वजह लोगों का पहनावा और रहन-सहन है। पीठ दर्द को काम करने में असमर्थ होने की ब़ड़ी वजह भी बताया गया है।
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