किडनी में स्टोन होने पर तेज दर्द की शिकायत हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बिना दर्द के किडनी स्टोन का असरदार इलाज किया जा सकता है। यह सब बैक्टीरिया से किया जा सकता है।
एक शोध में पाया गया कि जिन लोगों के शरीर में कुदरती रूप से बैक्टीरियम ऑक्सलोबैक्टर फार्मिजेन नाम का बैक्टीरिया होता है उनमें दर्दनाक किडनी स्टोन होने का खतरा आम लोगों की तुलना में 70 फीसदी कम होता है।
अमेरिका में बोस्टन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक अब इस बैक्टीरिया का इस्तेमाल कर किडनी स्टोन का जैविक इलाज खोजने में जुटे हुए हैं। इस बारे में किए गए शोध की रिपोर्ट अमेरिकन सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित हुई है।
यूरोलॉजिस्ट डेरेक मैशीन के मुताबिक यूरिन में मौजूद बेकार तत्वों की वजह से जो छोटे और कठोर टुकड़े बन जाते हैं वही किडनी स्टोन है। आमतौर पर ये किसी रेत के दाने से लेकर मोती तक के आकार के हो सकते हैं। ये चिकने या नुकीले भी हो सकते हैं और इनका रंग पीला या भूरा हो सकता है।
एक बार किडनी में स्टोन बन जाए तो यह यूरिनरी सिस्टम के दूसरे हिस्से में भी जा सकता है। वहाँ वह यूरिन निकलने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। इसकी वजह से इंफेक्शन, तेज दर्द और कभी-कभी तो किडनी फेल होने तक की नौबत आ सकती है।
ब्रिटेन में हालत गंभीर : ब्रिटेन में 20 पुरुषों में से तीन और 20 महिलाओं में से एक को किडनी स्टोन की परेशानी होती है। इसकी आशंका ज्यादा 20 से 40 साल की उम्र तक होती है। करीब 80 फीसदी किडनी स्टोन कैल्शियन ऑक्सॉलेट नाम के कंपाउंड होते हैं। फार्मिजेंस में ऑक्सॉलेट को तो़ड़ने की क्षमता होती है। सामान्य वयस्कों में आमतौर पर फार्मिजेंस ब़ड़ी तादाद में होते हैं।
ये हैं कारण : विटामिन डी की ज्यादा मात्रा, शरीर में खनिज पदार्थों का असंतुलन, किडनी में खराबी, शरीर में पानी की कमी, गठिया, अनियमित खानपान, यूरिनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) संक्रमण।
किडनी स्टोन के लक्षण : पेशाब में खून आना, पेशाब में बदबू, उल्टी आना, बुखार आना, पेशाब में जलन होना, जल्दी-जल्दी पेशाब होना।
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