आने वाले समय में रोबोट को भी गर्मी लगेगी। और हो सकता है कि उसके लिए आपको अपना एयरकंडीशनर भी चलाना प़ड़े। दरअसल हुआ यह है कि कृत्रिम त्वचा बनाई जा चुकी है, जो यह आभास दिला सकेगी कि कितनी गर्मी है और कितनी ठंड। इसी के चलते यह माना जा सकता है कि आने वाले समय में घरों में काम करने वाले रोबोट जो ऐसी त्वचा लगाए होंगे, वे भी गर्मी में कहेंगे- जरा एयरकंडीशनर चालू करना।
यह जानकारी एबीसी को अमेरिका के ओक रिज नेशनल लेबोरेटरी नेनोमटेरियल्स सिंथेसिस एंड प्रॉपर्टीज के वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक जॉन सिम्पसन ने दी। यह कृत्रिम त्वचा पॉलीमर की महीन परतों की बनी हुई है। इसमें कार्बन नेनोट्यूब्स भी लगे हैं। वे कहते हैं कि कार्बन नेनोट्यूब तकनीकी की बदौलत हम न केवल त्वचा के बहुत करीब पहुँच चुके हैं, वरन हम उससे बेहतर त्वचा बनाने को तैयार हैं।
सिम्पसन और उनके साथी लिया इवेनोव फिल्मस्किन नाम की एक परियोजना पर काम कर रहे हैं। यह लचीली, एकीकृत, हल्की और बहुपयोगी त्वचा से संबंधित है। इस परियोजना के लिए शोधकर्ता नेनोट्यूब्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि इनसे बनी सामग्री का उपयोग कई स्थानों पर हो सकता है।
सबसे बड़ी विशेषता : इसकी सबसे बड़ी विशेषता नेनोट्यूब में कार्बन का होना है। यह बायोकंपेटिबल है, यानी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इसे बाहरी अवयव नहीं मानती है। भविष्य में यह मनुष्य के शरीर के तंत्रिका तंत्र में सेंसर वायर की तरह प्रयुक्त किया ज सकता है। इससे फायदा यह होगा कि सूचना आसानी से दी जा सकेगी और साथ ही दिमाग को भी अग्रिम जानकारी मिल सकेगी। यह दल फिलहाल इस तरह की त्वचा पर भी कार्य कर रहा है, जो पानी को रोक सके। यह त्वचा तापमान के असर को महसूस कर सकती है। त्वचा की महीन ऊपरी सतह विशेष रूप से नेनो से बनी सामग्री से तैयार की गई है। इसे रेत के सूक्ष्म कणों से बनाना शुरू किया जाता है और पॉलीमर पर इसको स्प्रे किया जाता है।
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