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मुशर्रफ को सजा-ए-मौत!
मुशर्रफ विरोधी समूह पाकिस्तान के राष्ट्रपति को पद से हटाने की कोशिश तो कर ही रहा है, वकीलों की बिरादरी इस काम में एक कदम आगे बढ़ गई है। उसके छद्म न्यायालय में राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया और यहाँ तक कि उन्हें मौत की सजा भी दे दी गई।

समूचे देश के वकीलों के 'काला झंडा सप्ताह' के तहत कराची में आयोजित छद्म न्यायालय ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को सोमवार को मौत की सजा दी।

कराची बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महमूद उल हसन और सिंध बार काउंसिल के सदस्य ईशाक और मोहम्मद अली अब्बासी की तीन सदस्यीय अदालत ने छद्म सत्र में मुशर्रफ पर लगे आरोपों की सुनवाई की।

द न्यूज में आई खबर के मुताबिक याचिकाकर्ता निहाल हाशमी ने महाभियोग प्रस्ताव पेश किया और राष्ट्रपति पर संविधान निलंबित करने, असेंबलियों को भंग करने, प्रधानमंत्री को गिरफ्तार करने और लाल मस्जिद पर सैन्य कार्रवाई जैसी घटनाओं के लिए ठहराया गया।

हाशमी के प्रतिनिधित्व में वकीलों की बिरादरी ने अक्टूबर 1999 में असंवैधानिक तरीके से नेशनल असेंबली भंग करने और तत्कालीन प्रधानमंत्री को गिरफ्तार करने के अलावा मीडिया के खिलाफ सेंसर लगाने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति के खिलाफ आरोपों की सूची पेश की।

मुशर्रफ पर परमाणु वैज्ञानिक एक्यू खान और सुप्रीम कोर्ट के बर्खास्त चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी और उनके परिवार को अवैध तरीके से हिरासत में रखने और संविधान का उल्लंघन कर आपातकाल लगाने का भी आरोप लगाया गया।
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