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रेल सेवा के लिए भारत की मंजूरी चाहिए
बांग्लादेअंतरिम ैबिनेट के सूचना सलाहाकार गुलाम कादर ने कहा है कि अगले माह आने वाले बंगालियों के नववर्ष 'पहला ैशाख' के मौके पर ढाका और कोलकाता के बीच सीधी रेल सेवा शुरू करने के लिए बांग्लादेश को भारत की मंजूरी का इंतजार है।

उन्होंने रविवार को कहा कि बांग्लादेश सरकार की कैबिनेट द्वारा मंजूर किया गया ढाका-कोलकाता के बीच रेल सेवा का समझौता अब भारत के विदेश मामलों के मंत्रालय के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया है।

कादर ने कहा कि निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक रेल सेवा 14 अप्रैल को आने वाले त्योहार पहला वैशाख पर शुरू किए जाने की है, लेकिन सब भारत सरकार की मंजूरी पर निर्भर है।

आपातकाल के दौर से गुजर रहे बांग्लादेश के सलाहकार परिषद या अंतरिम सरकार के कैबिनेट ने पिछले माह भारत के उस प्रस्ताव को स्वीकार किया था, जिसमें ढाका और पश्चिम बंगाल की राजधानी के बीच सीधी रेल सेवा के लिए सीमा पर स्थित शून्य रेखा पर बक्से के आकार में बाड़ लगाने की बात कही गई थी।

समझौते के मुताबिक बांग्लादेश भी अपनी सीमा पर उसी तरह का निर्माण करेगा। रेल सेवा को जोड़ने की योजना अधर में इसलिए लटकी थी क्योंकि भारत द्वारा शून्य रेखा के 150 गज के क्षेत्र में तस्करी की जाँच के लिए धातु का ढाँचा बनाने के मुद्दे पर बांग्लादेश में विवाद था।

रेल सेवा अगस्त 2007 में शुरू होना थी, लेकिन विवाद के कारण योजना टल गई। कैबिनेट के निर्णय के तहत 'मोएत्री एक्सप्रेस' ट्रेन के लिए पटरियाँ ढाका स्थित सैन्य छावनी से दर्शना सीमा होते हुए कोलकाता के चितपुर के बीच बिछाई जाएँगी। एक सवाल के जवाब में सलाहकार ने कहा कि अभी कुछ छोटे मुद्दे सुलझाना बाकी हैं, लेकिन पहले दोनों देशों के बीच रेल सेवा शुरू होने दी जाए।
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