अमेरिकी सेना में पहली बार धर्मगुरु की जिम्मेदारी एक मुस्लिम महिला को सौंपने की बात चल रही है परंतु मामला अदालत पहुँच गया है। 47 वर्षीय शरेदा हुसैन वह शख्सियत है। वे माँ भी हैं।
स्वयं शरेदा को इस नियुक्ति पर आश्चर्य है। वे टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में धर्मगुरु की भूमिका निभा रही हैं। वे पहली मुस्लिम महिला हैं, जिन्हें अमेरिका में यह पद नवाजा जाना है। वे इसे खुदा का आदेश मानती हैं। वे अमेरिकी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल रही हैं। सेना में वे बेहद खुश रहीं। योग की जानकार शरेदा इन दिनों श्रद्धा और विश्वास को टटोल रही हैं। वे मानती हैं कि सेना में धर्मगुरु के रूप में वे मुस्लिम महिला और पुरुषों की कुछ मदद कर सकेंगी। फिर भी अदालती आदेश की प्रतीक्षा करना होगी।
4 फुट 10 इंच की इस सैनिक ने अमेरिका में ही स्नातकोत्तर किया और अमेरिकी सेना में ही धर्मगुरु की भूमिका निभा सकती हैं। वे इस बात को सिरे से खारिज करती हैं कि किसी रेकॉर्ड की खातिर उन्होंने यह पद स्वीकारा। वे मूलतः त्रिनिदाद से हैं और उनके पूर्वज 130 साल पहले भारत से त्रिनिदाद आकर बसे थे।
कौन बनता है धर्मगुरु! : सेना में धर्मगुरु के चलन का सबसे पुराना संदर्भ प्रथम विश्व युद्ध के काल का है। यह अमेरिका में चैपलेन कहा जाता है, जो सैनिकों को आध्यात्मिक रूप से मदद करता है। पहले यह पद नौसेना में बनाया गया था। ब्रिटिश सेना और रॉयल एयर फोर्स में यह पद पहले-पहल कायम किया गया। अमेरिकी सेना में यह पद व्यक्ति के सेवाकाल को देखकर दिया जाता है। अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरह से इस पद पर व्यक्ति मनोनीत किए जाते हैं।
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