चार में से एक आदमी ऐसा होता है, जिसको जोड़-घटाव करने में परेशानी आती है। इसमें महिलाएँ तो और भी पीछे हैं। तीन में से केवल एक ही महिला गणित आसानी से कर पाती है।
इस संबंध में करीब 2000 लोगों से राय ली गई। जवाब देने वालों में से 47 प्रश ने यह कहा कि उन्होंने स्कूल में ही जो गणित सीखना था सीखा। करीब आधी महिलाओं की दिक्कत यह थी कि उनके परिवार में बच्चे या कोई अन्य उनसे गणित के सवाल पूछ लेते हैं तो जवाब देते नहीं बनता है। इस सर्वेक्षण में एक पुराने शोध को भी शामिल किया गया। इसके मुताबिक आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जो गणित को हल करने में भारी दिक्कत महसूस करता है। युवाओं में ऐसा : सर्वेक्षण कहता है कि 25 से 34 साल की आयु वाले लोगों में से पाँच में से एक व्यक्ति को गणित में सब आता है और उनका करियर इससे जुड़ा होता है। इसके अलावा गणित को लेकर परेशानी दूसरे वर्ग में भी नजर आई। काम करने वाले प्रोफेशनल, प्रशासक, प्रबंधकों में 3 प्रश गणित से परेशान हैं। कुशल व्यापारियों में भी 4 प्रश दिमागी जोड़-तोड़ से परेशान रहते हैं। 64 का वर्गमूल बताओ, इसका तक जवाब कई लोगों को नहीं मालूम था। पाँच में से एक ही आदमी इसका जवाब दे सका। इस तरह के आठ प्रश्न पूछे गए थे।
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