यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि आने वाले दस साल में गैंगवार रोबोट के दम पर लड़ा जाएगा। रणभूमियों में रोबोट पहले से ही प्रवेश कर चुके हैं। यानी अरनॉल्ड की फिल्म टर्मिनेटर का दृश्य पूरी दुनिया में कड़वी हकीकत बनी नजर आ रही है। यह चेतावनी दी है, रोबोट बनाने वाले कुछ महारथियों और इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने। रोबोट हथियारों की हो़ड़ अगले दस साल में नजर आने लगेगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि आदमी का जीवन रोबोट पर निर्भर करेगा।
प्रो. नोएल शर्के ने चेतावनी दी है कि हथियारबंद रोबोट आतंकवादियों का हथियार भी बन सकते हैं। प्रो. शर्के यूनिवर्सिटी ऑफ शैफील्ड में कृत्रिम गुप्तचर व रोबोट विशेषज्ञ माने जाते हैं। उनके मुताबिक यह एक ऐसा जिन्न है, जिसे अब बोतल में वापस भेजना मुमकिन नहीं रहा है। इस तरह के हथियार एक बार तैयार हो गए हैं, इसलिए इनकी नकल बनाना अब ज्यादा जटिल नहीं रहा।
हाल ही में रॉयल युनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट नामक संस्था में अपने उद्घाटन भाषण में प्रो. शर्के ने यह चेतावनी दी कि जटिल से जटिल अभियान के लिए स्वायत्त रोबोट का विकास बड़े पैमाने पर हो रहा है। सेना को और अधिक खतरनाक बनाने के लिए इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। बीबीसी के रोबोट वॉर्स कार्यक्रम में प्रो. शर्के जज बन चुके हैं।
वे बताते हैं कि रोबोट बनाने की कीमत तेजी से कम होती जा रही है। इनको तैयार करने वाले कंपोनेंट बाजार में आसानी से मिलने लग जाएँगे। ऐसे में किसी भी प्रोफेशनल के लिए किलर रोबोट बनाना दुविधापूर्ण नहीं रह जाएगा।
रियर एडमिरल क्रिस पैरी का कहना है कि मानवरहित विमान आतंकियों का ब़ड़ा हथियार बन सकते हैं। इनको बनाना आसान है और राडार पर पकड़ना भी मुश्किल है। उन्होंने हिजबुल्ला के विमानों का भी जिक्र किया।
इराक में लड़े : 2006 से कुछ रोबोट इराक में तैनात हैं। करीब 4000 रोबोट इराक में लगाए थे। मानवरहित विमान भी वहाँ 4,00,000 घंटे की उ़ड़ान भर चुके हैं। अभी तक होता यह रहा है कि परिस्थितियाँ देखकर ही मनुष्य हमला करता है, परंतु रोबोट को एक बार फीड करने पर वह वापस नहीं आ सकता, वह अपने काम को पूरा करने पर ही रुक सकेगा।
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