सामान्य सर्जरी के लिए ब्रिटेन के मरीजों को सरकारी खर्च पर भारत आने की अनुमति देने के भारत सरकार के प्रस्ताव का यहाँ ब्रिटेन में विरोध हो रहा है।
वर्तमान में ब्रिटिश नागरिकों को इलाज के लिए सरकारी खर्च पर यूरोप में ऐसी किसी भी जगह जाने की अनुमति है जहाँ अधिकतम तीन घंटे की हवाई यात्रा करके पहुँचा जा सकता है। इससे अधिक समय के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा एनएचएस द्वारा लिखित अनुमति नहीं है। वर्तमान में एनएचएस के तहत इलाज के लिए लगने वाली लंबी लंबी लाइनों से बचने के लिए ब्रिटिश रोगी अपने खर्चे पर भारत आते हैं।
भारत के स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास ने हाल ही में ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग को सुझाव दिया कि यदि तीन घंटे के उड़ान समय को बढ़ाया जाता है तो वहां के नागरिक भी सस्ता और अच्छा इलाज पा सकते हैं। बैठक के बाद रामदास ने कहा कि हमने उड़ान समय बढ़ाने की अपील की है। आज की वैश्विक दुनिया में तीन घंटे और साढ़े सात घंटे की उड़ान में कोई खास अंतर नहीं है।
ब्रिटेन स्वास्थ्य विभाग ने इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया है लेकिन इन खबरों के बाद एनएचएस को राष्ट्रीय गर्व मानने वाले अनेक ब्रिटिश नागरिकों ने नाराजगी जताई और ब्रिटिश करदाताओं द्वारा कर के रूप में अदा की गई धनराशि की कीमत पर रोगियों की भारत यात्रा के प्रति विरोध जताया है। अनेक नागरिकों ने स्थानीय अखबारों में इस बारे में कड़े पत्र लिखे हैं।
बर्मिंघम निवासी डेनिस फ्रोगाट ने अपने पत्र में लिखा कि पहले डॉक्टर और नर्स बाहर से आते हैं कुछ समय बाद उनको हटा दिया जाता है। हमारे विद्यार्थियों को सालों की पढ़ाई के बाद नौकरी नहीं मिलती और अब एनएचएस मरीजों को भारत भेजना चाहता है। क्या हम अपनी नौकरियाँ बचा नहीं सकते और अपने यहाँ सब कुछ ठीक नहीं कर सकते।
एनएचएस के एक प्रवक्ता के अनुसार सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एनएचएस स्वास्थ्य पर्यटन के लिए पैसा नहीं देगा। स्वास्थ्य विभाग के स्थाई सचिव हघ टेलर भारत के स्वास्थ्य मंत्री से मिल चुके हैं और एनएचएस मरीजों को भारत भेजने का प्रस्ताव भी मिला लेकिन अभी इस प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगी है।
एक सर्वे के अनुसार 2007 में 70 हजार ब्रिटिश नागरिकों ने इलाज के लिए विदेश यात्रा की जिसमें भारत को भी पसंद किया गया। यह आंकड़ा इस दशक के अंत में दो लाख तक पहुँचने की संभावना है।
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