जीवन का सबसे सुनहरा दौर होता है बचपन। एक अध्ययन से पता चला है कि अब यह दौर 11 वर्ष की उम्र में ही समाप्त हो जाता है और अपने बच्चों की बातों को मानने के दबाव के आगे माता-पिता को हार माननी पडती है।
ब्रितानी अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि बच्चे अपने अभिभावकों पर इस बात का दबाव डालते है कि उन्हें अधिकाधिक स्वतंत्रता दी जाए और यह बात उनके माता पिता के अनुभव और बच्चों के लालन पालन के पारंपरिक तरीके से ठीक विपरीत है।
'द डेली टेलीग्राफ' की सोमवार की रिपोर्ट और इस अध्ययन के अनुसार अधिकांश किशोरवय के बच्चों को अल्कोहल का सेवन करने की देर तक घर से बाहर रहने की और रात को अपने दोस्तों के घर रुकने की अनुमति मिलने लगी है।
पहले की तुलना में बच्चियाँ बहुत तेजी से बढ़ रही हैं और अब वे गुड़ियों से खेलने के बजाए फैशनेबल कपड़े पहनना कान छिदवाना और अपने बालों को रंगवाना ज्यादा पसंद करती हैं। 1170 अभिभावकों और उनके 18 से कम उम्र के बच्चों पर किए गए सर्वे के बाद अनुसंधानकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं।
सर्वे से यह भी पता चला है कि पुरानी पीढ़ी और उदार नजरिए के आज के अभिभावकों के बीच बहुत अंतर है। नई पीढ़ी के 55 प्रतिशत अभिभावकों का कहना है कि बाल्यावस्था 11 वर्ष की उम्र में तभी समाप्त हो जाती है जब बच्चा प्राइमरी स्कूल से सेकेंडरी स्कूल में आता है।
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