नेपाल में आठ अप्रैल को होने वाले संविधान सभा के चुनाव में माओवादियों ने ज्यादातर युवाओं को टिकट देकर अन्य राजनीतिक दलों के लिए मुश्किल बढ़ा दी है।
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सीपीएन-एम) ने कुल 126 टिकट ऐसे उम्मीदवारों को दिए है, जिनकी उम्र 25 से 40 साल के बीच की है। माओवादियों की इस रणनीति का मकसद ज्यादा से ज्यादा युवा वोट हासिल करने की है। माओवादियों ने 41 से 50 साल की उम्र के बीच 52 उम्मीदवार उतारे है, जबकि केवल सात उम्मीदवार ऐसे है, जो 60 की दहलीज पर है।
नेपाली राजनीति की पुरानी और दिग्गज नेपाली कांग्रेस को अब भी उम्रदराज और मंझे हुए राजनीतिज्ञों पर ज्यादा भरोसा है। नेपाली कांग्रेस के 85 उम्मीदवार 51 से 60 साल की उम्र के बीच के है। पार्टी ने केवल 17 ऐसे उम्मीदवार चुनाव में उतारे है, जो 25 से 40 साल की उम्र के बीच है।
राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक पार्टी की स्थिति भी कमोबेश ऐसी है। पार्टी के 74 उम्मीदवार पचास साल से ऊपर के है, जबकि 28 ऐसे भी उम्मीदवार है, जो 60 साल की उम्र भी पार कर गए है। माओवादियों के उम्मीदवारों की औसत उम्र भी अन्य पार्टियों से कहीं ज्यादा है।
माओवादियों द्वारा चुनाव में खड़े किए गए कुल 203 उम्मीदवारों की औसत उम्र 39.23 साल है। माओवादियों के बाद नेपाल की एक अन्य कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएन.यूएमएल) का नंबर आता है, जिसने युवाओं को ज्यादा तरजीह दी है। लामझुंग सीट से चुनाव में उतरे निर्दलीय धन प्रकाश गुरूंग सबसे ज्यादा उम्र के उम्मीदवार है, जबकि उषा भट्ट, झरिना शाक्या, खगेन्द्र भंडारी, महेश शाही (सभी 25 साल) सबसे युवा उम्मीदवारों की सूची में है।
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