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35 वर्ष बाद कश्मीरसिंह रिहा होंगे
दस्तावेज पूरे होने के बाद पाकिस्तान की जेल में 35 साल से जासूसी के आरोप में बंद भारतीय नागरिक कश्मीरसिंह के सोमवार को रिहा हो जाने की उम्मीद है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा कल उनकी दया याचिका को स्वीकार कर लेने के बाद नकी रिहाई होने जा रही है।

कश्मीरसिंह को 1973 में जासूसी के आरोपों में रावलपिंडी में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें पाकिस्तान की सैनिक अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। पाकिस्तान के कार्यवाहक मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी ने कहा कि कश्मीरसिंह की रिहाई की प्रक्रिया की फाइल पाकिस्तानी प्रधानमंत्री सचिवालय में चलाई गई।

बर्नी ने कहा मामला अब गृह मंत्रालय के पास है और दस्तावेज संबंधी काम सोमवार तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। मैं कश्मीरसिंह की यात्रा से संबंधित दस्तावेज तैयार कराने में भारतीय उच्चायोग के संपर्क में भी रहूँगा ताकि रिहाई के तत्काल बाद वह अपने घर जा सकें।

उन्होंने कहा कश्मीरसिंह हमारे भाई जैसे हैं और उन्होंने मौत के साए में जेलों में लंबा समय गुजारा है। उनके साथ खास बर्ताव होनी चाहिए। बर्नी ने खुलासा किया कि पहली बार तो मुशर्रफ को यकीन ही नहीं हुआ कि कश्मीरसिंह इतने लंबे समय से जेल में बंद हैं, लेकिन बंदी के मामले से सबंधित तथ्यों को देखने के बाद वह दया याचिका पर विचार करने को तैयार हो गए।

उन्होंने कहा मामले में कुछ कानूनी और तकनीकी समस्याएँ थीं। हमारे पास सिंह का उचित रिकॉर्ड नहीं था। नकी ओर से 1978 में दायर की गई दया याचिका तत्कालीन पाक राष्ट्रपति फजल इलाही चौधरी द्वारा खारिज कर दी गई थी।

बर्नी ने कहा हमारे कानून के अनुसार किसी राष्ट्रपति द्वारा एक बार दया याचिका खारिज हो जाने के बाद दूसरी याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। मैंने मुशर्रफ से मानवीय आधार पर विचार करने की अपील की। मैंने उनसे कहा कि विशेष मामलों में कानून को एक तरफ किया जा सकता है।

बर्नी ने कहा कि वह सिंह को रिहा कराने से संबंधित कागजात लेकर खुद लाहौर सेंट्रल जेल जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा मुझे उम्मीद है कि सोमवार तक सभी कागजात पूरे हो जाएँगे और तब सिंह को वाघा सीमा के जरिए घर भेजा जा सकता है। बर्नी ने कहा मैं कश्मीरसिंह के बेटे और पत्नी से भी संपर्क कर चुका हूँ और वे काफी उत्सुक हैं।

उन्होंने कहा मैं उनकी रिहाई से पहले उन्हें नया सूट देने की इच्छा भी पूरी करना चाहता हूँ। कश्मीरसिंह ने मुझसे कहा था कि उन्होंने प्रेम विवाह किया था और वह सलवार कमीज की जगह नया सूट पहनकर अपनी पत्नी से मिलना चाहते हैं।

बर्नी ने कहा हम कश्मीरसिंह के पुनर्वास में उनकी कुछ वित्तीय मदद करना चाहते हैं। वह अब बूढ़े़ हो चुके हैं और हो सकता है कि वह अब शायद काम न कर पाए। उनके नाम से हमारी एक बैंक खाता खोलने की योजना है ताकि उन्हें पनुर्वास में कुछ मदद मिल सके।

बर्नी को लाहौर सेंट्रल जेल में कश्मीरसिंह उस समय मिले थे, जब वह जेल सुधारों और बंदियों के अधिकारों के लिए अपने काम के रूप में जेल के दौरे पर थे। बर्नी और भारतीय सांसद अविनाश राय खन्ना के प्रयासों के चलते पंजाब के होशियारपुर में कश्मीरसिंह के परिवार को खोज लिया गया।

कश्मीरसिंह के अनुसार वह अमृतसर पुलिस के लिए काम करते थे। वह कथित तौर पर पाकिस्तान से भारत में मादक पदार्थों की तस्करी के काम में शामिल थे। पेशावर यात्रा के दौरान उन्हें उनके साथी के साथ 1973 में गिरफ्तार कर लिया गया।

उनके दूसरे साथी को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई, जिसे कई साल पहले भारत वापस भेज दिया गया। कश्मीरसिंह को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई और वह 35 साल तक मौत के साए में साँसें गिनते रहे हैं।
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