डेवलपर- यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीज़
अपनी मातृभूमि से अलग-थलग, अंजान देशों में शरणार्थियों की तरह भटकने का दर्द क्या होता है, इसे क्या िकसी कम्प्यूटर गेम या ऑनलाइन गेम खेलते वक्त महसूस किया जा सकता है?
आमतौर पर कम्प्यूटर गेम्स रोमांच व हिंसा प्रधान माने जाते हैं, मगर कई बार इनके द्वारा सार्थक सन्देश भी दिए जा सकते हैं। कुछ ऐसा ही प्रयास संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय (यूएनएचसीआर) ने भी किया है। उन्होंने एक ऐसा शिक्षाप्रद गेम बाजार में उतारा है, जिसमें हिंसा नहीं बल्कि हिंसा के बाद के दर्द यानी शरणार्थियों की तकलीफ को समझने में आसानी होगी।
इस गेम में एक से दो खिलाड़ियों का प्रयोग होता है, जिसमें उन्हें बहुत सारी चुनौतियों जैसे शत्रु के शहर से भाग निकलना, खतरनाक सीमा के पार खुद को बचाए रखना और विदेशी भाषा और लोगों के बीच जीवित रहना आदि से गुजरना पड़ता है। साथ ही इसमें हारने पर स्क्रीन पर खून-खराबे के भयानक मंजर से गुजरना पड़ सकता है। | इस गेम के पीछे संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय का अभिप्राय लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है क्योंकि वर्तमान आँकड़ों के अनुसार विश्व के हर 300 व्यक्तियों में से 1 व्यक्ति शरणार्थी है... |
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इस गेम के पीछे संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय का अभिप्राय लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है क्योंकि वर्तमान आँकड़ों के अनुसार विश्व के हर 300 व्यक्तियों में से 1 व्यक्ति शरणार्थी है। विश्वभर में शरणार्थियों की समस्याओं को इस गेम के माध्यम से लोगों तक पहुँचाने का एक अच्छा प्रयास यूएनएचसीआर ने किया है। इस गेम में विभिन्न लेवल्स हैं, जिनके माध्यम से शरणार्थी समस्या को बताया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं विशेषकर बच्चों में इस समस्या के प्रति संवेदनशील नजरिया पैदा करना है।
इस गेम के साथ इसकी वेबसाइट पर शिक्षकों के लिए एक अनुदेशिका तथा एक विवरण शीट भी मौजूद है।
उम्मीद है कि ऐसे गेम्स द्वारा न सिर्फ मनोरंजन को नई दिशा मिलेगी बल्कि मानवीय जागरूकता के साथ यह सार्थक दिशा भी प्रदान करेगा।
(फोटो- यूएनएचसीआर की वेबसाइट से लिया गया है।)
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