नई दिल्ली। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने माइक्रो, लघु और मध्यम औद्योगिक इकाइयों में सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित उत्पादों की खपत बढ़ाने के वास्ते इनके मूल्यों में 3 वर्षों के लिए एकमुश्त 100 प्रतिशत कमी करने पर विचार करने की सरकार से सिफारिश की है। सीआईआई के अनुसार इससे उच्च प्रौद्योगिकी निवेश में करों का बोझ कम होगा, कम्प्यूटरों की बड़ी मात्रा में खरीद बढ़ेगी जिससे श्रम उत्पाद बढ़ेगा और आर्थिक विकास में बढ़ोतरी होगी। अंततः इससे माइक्रो, लघु, मध्यम उद्योगों के साथ-साथ पूरी अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा। सीआईआई की यहाँ जारी विज्ञप्ति के अनुसार देश में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) तथा कम्प्यूटर के उपयोग को बढ़ावा देने के सरकार और उद्योग दोनों के समान उद्देश्य हैं। हालाँकि विकसित और कुछ विकासशील देशों की तुलना में वर्तमान में भारत में इसकी गति बहुत धीमी है। आईसीटी और कम्प्यूटर को बढ़ावा देने के लिए इनके मूल्यों में कमी लाना अत्यंत आवश्यक है। सीआईआई के महानिदेशक चन्द्रजीत बनर्जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में लघु और मध्यम उद्योगों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि औद्योगिक उत्पाद का अनुमानित 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं उद्योगों का होता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास की वर्तमान दर और इस क्षेत्र को प्रतिद्वंद्वी दर बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धा परिषद ने इसमें आईसीटी और कम्प्यूटर के उपयोग को बढ़ावा देने को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। |