भारत की सूचना प्रौद्योगिकी निर्यात करने वाली तीसरी बड़ी कंपनी विप्रो लिमिटेड की नजर जापान के बाजार पर है।
कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी ए एल राव ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जापानी बाजार में अपनी पैठ बनाने के लिए यहाँ की कंपनियों के साथ गठबंधन के साथ ही विलय एवं अधिग्रहण पर विचार कर सकती है।
राव ने कहा कि पिछले दो वर्ष के दौरान कंपनी ने बहुत सफल अधिग्रहण किए हैं। कंपनी को अनुकूल कोई सौदा सामने आएगा तो वह जापान में भी इस दिशा में कदम उठाने के लिए तैयार है। विप्रो की योजना अगले माह जापान में एक गठबंधन की घोषणा करने की है, किंतु राव ने इस संबंध में और कोई विवरण नहीं दिया।
जापान के सॉफ्टवेयर सेवा उद्योग की एटीटी डाटा कॉर्पोरेशन और एनईसी कार्पोरेशन जैसी बड़ी कंपनियों का भारतीय बैंकों, डाक प्रणाली और निर्माताओं के साथ मजबूत गठजोड़ है। इससे विदेशी कंपनियों को बड़े ऑर्डर लेने में परेशानी आती है।
पिछले सप्ताह विप्रो की प्रतिस्पर्धी इन्फोसिस टेकनोलोजीस ने जापान की निहोन यूनीसिस लिमिटेड के साथ रणनीतिक गठजोड़ किया है जिससे कि वह मिलकर नए उत्पाद विकसित कर सकें।
विप्रो 1998 से जापान में कार्यरत है। कंपनी ने कहा है कि जापान से उसे होने वाली आय चालू वित्त वर्ष की समाप्ति पर 10 अरब येन अर्थात नौ करोड़ 26 लाख डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है।
विप्रो के जापान और चीन परिचालन के मुखिया हिरोशी एली ने कहा कि कंपनी की योजना जापान कंपनियों के साथ सरकारी परियोजनाओं के लिए गठबंधन करने की है।
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