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2007 में सूचना-तकनीकी-जालजगत : एक सिंहावलोकन
सोशल नेटवर्किंग साइट - फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को वर्ष 2007 का टैक हीरो माना जा सकता है, जिन्होंने एक बार फिर से ये सिद्ध कर दिया कि सरल, मगर काम के आइडिया क्लिक कर सकते हैं। एक छोटा-सा प्रोजेक्ट देखते-ही-देखते अरबों रुपयों का जालस्थल बन सकता है. हालाँकि फेसबुक में विज्ञापनों को प्रदर्शित किए जाने को लेकर उनकी अच्छी-खासी आलोचना भी हुई.

इस वर्ष के शीर्ष डाउनलोड प्रोग्रामों की सूची देखें तो पाते हैं कि वर्ष 2007 में शीर्ष डाउनलोड प्रोग्रामों में अवास्त एंटी वायरस प्रोग्राम शामिल रहा है, जो यह इंगित करता है कि वायरसों ने वर्ष 2007 में कम्प्यूटरों में संक्रमण के खतरों को कम नहीं किया। मगर फिर भी, हालात माई डूम और आई लव यू जैसे वायरसों वाले तो नहीं ही रहे। घरेलू कम्प्यूटरों के लिए अवास्त एंटीवायरस एक फ्रीवेयर प्रोग्राम है और यह एक उम्दा एंटीवायरस प्रोग्राम है, जो तीव्र गति से काम करता है - यानी कम्प्यूटर को धीमा नहीं करता, और इसकी वायरसों को पहचानने की ताकत भी अच्छी है. 60 से अधिक फ़ाइल फ़ॉर्मेटों का समर्थन करने वाला चित्र-प्रदर्शक व संपादन का फ्रीवेयर प्रोग्राम इरफ़ान व्यू भी अत्यधिक डाउनलोड की सूची में स्थान पाने में सफल रहा है

इनफ़ॉर्मेशन ओवरलोड के इस दौर में वर्ष 2007 में ट्विटर ने पदार्पण किया और आते ही इसने अपने पाँव गहरे जमा लिए। यूँ तो ट्विटर जैसी माइक्रो-ब्लॉगिंग सेवाएँ और दूसरी भी पहले से ही थीं, और पावेंस को ट्विटर से बेहतर माना जाता है, मगर ट्विटर का आसान प्रयोग, आसान इंटरफेस इसे हिट बना गया. यह वर्ष 2007 का सबसे सफल वेब अनुप्रयोग है. शुरूआती दिनों में ही ट्विटर सफल होने लगा था और इसके रिसोर्सेस को हर महीने दुगना करना पड़ रहा था. जबकि जूस्ट जैसी ऑनलाइन टीवी दिखाने वाली सेवाएँ भी 2007 में आईं, मगर वे यू ट्यूब के वीडियो जैसी हलचलें नहीं मचा पाईं।

एक तरह से देखा जाए तो वर्ष 2007 असफल लाइव अनुप्रयोगों का साल कहा जाएगा। गूगल डॉक्स से लेकर विंडोज लाइव और जोहो सूट से लेकर ‘सबीर हाटमेल भाटिय’ के लाइव डॉक्यूमेंट तक सभी जोर-शोर से आए, मगर आम प्रयोक्ताओं में अपनी पैठ बना पाने में एक तरह से असफल ही रहे। जीवंत इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भरता और इन जाल-अनुप्रयोगों का बेहद धीमा चलना इनकी प्रसिद्धि और स्वीकार्यता में बाधक बन गया. हालाँकि टेक पंडितों के अनुसार, भविष्य जाल-अनुप्रयोगों का ही होगा और लाइव ऑफिस सूट अपनी जगह बनाने में सक्षम होंगे

हिन्दी जालजगत भी 2007 में अच्छा-खासा समृद्ध हुआ। एमएसएन पहले ही हिन्दी को अपना चुका था। याहू हिन्दी समेत कई भारतीय भाषाओं में धूम-धड़ाके से आया। एओएल ने भी भारत में अँग्रेजी, हिन्दी और तमिल भाषाओं में पाँव पसारे। अभिव्यक्ति से शुरुआत हुई और दैनिक जागरण से लेकर वेब दुनिया और साल का अंत आते-आते दैनिक भास्कर तक हर प्रमुख हिन्दी जालस्थल ने हिन्दी यूनीकोड को अपना लिया। इसी साल जोश 18 हिन्दी में आया और उसने भी सफलता के स्वाद चखे.

यह था वर्ष 2007 का एक संक्षिप्त लेखा-जोखा। वर्ष 2008 में सूचना-तकनीक की दुनिया में क्या नया होता है और इसकी रफ़्तार क्या होती है, यह देखना दिलचस्प होगा। जैसा कि मशाबल में एडम चुटीली भविष्यवाणी कर रहे हैं - वर्ष 2008 में इंटरनेट सर्च में गूगल से टक्कर लेने के लिए माइक्रोसॉफ़्ट याहू को खरीद लेगा ? आप क्या सोचते हैं ? क्या सचमुच ऐसा कभी संभव हो सकेगा ?
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