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लैपटॉप की बढ़ती पहुँच
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शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के बच्चे अब 'लेपटॉप' से पढ़ाई करेंगे। बात चौंकाने वाली जरूर है, लेकिन यह सच है। शुरुआत शहरी क्षेत्रों से की जा रही है। केंद्र सरकार के सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्रत्येक संकुल केंद्र पर लेपटॉप उपलब्ध कराए जाएँगे और इसके लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस योजना के लिए प्रदेश के जिला मुख्यालयों एवं शहरी क्षेत्रों के 15-15 संकुल केंद्रों (शासकीय माध्यमिक विद्यालयों) को चुना गया है। राज्य शिक्षा केंद्र के अपर मिशन संचालक श्री राजेश जैन ने सर्वशिक्षा अभियान के जिला समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रत्येक केंद्र पर 3-4 शिक्षकों को लेपटॉप चलाने का विशेष प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करें।

इसके लिए ऐसे शिक्षकों का चयन किया जाए, जिन्हें या तो कम्प्यूटर में विशेष योग्यता हासिल हो अथवा जो इस क्षेत्र में रुचि रखते हों। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा इन स्कूलों में कम्प्यूटर कक्ष तैयार करने के लिए 12-12 हजार रुपए की राशि भी जारी की जा चुकी है। गुना जिला मुख्यालय सहित राघौगढ़, आरौन, चाँचौड़ा-बीनागंज के शहरी क्षेत्र में 32 माध्यमिक विद्यालयों में से 15 को इस योजना के तहत चयनित किया जाएगा।

कैसे होगा क्रियान्वयन

प्रत्येक संकुल केंद्र के अंतर्गत 10-12 माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय आते हैं। योजना यह है कि प्रत्येक केंद्र के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में सप्ताह के किसी खास दिन लेपटॉप भेजा जाएगा। लेपटॉप लेकर जाने वाला प्रशिक्षित शिक्षक छात्रों को कम्प्यूटर की कार्यप्रणाली के साथ विभिन्न विषयों की तैयार सीडी के माध्यम से कठिन पाठों की अवधारणाओं को समझाएगा।

हेडस्टार्ट योजना का चरण

यह हेडस्टार्ट योजना का अगला चरण माना जा रहा है। हेडस्टार्ट योजना के तहत संकुल केंद्रों पर कम्प्यूटर उपलब्ध कराए गए थे। इस योजना में समस्या यह थी कि छात्रों को हेडस्टार्ट केंद्र तक आना होता था। फिर बिजली की समस्या भी थी। वहीं शिक्षक भी बच्चों को हेडस्टार्ट केंद्र तक नहीं लाते थे। इसलिए यह योजना अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पा रही थी। अब कम्प्यूटर खुद ही छात्रों तक पहुँचेंगे। साथ ही लेपटॉप की बेटरी को चार्ज भी कर सकेंगे।

कार्टून फिल्मों से पढ़ा

राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय स्तर के गणित, विज्ञान, अँगरेजी जैसे कठिन विषयों के अलावा हिन्दी की खास सीडी पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है। इनमें संबंधित विषयों की कठिन अवधारणाओं को एनिमेशन के माध्यम से समझाया गया है। मसलन अक्सर बच्चों को यह बताना आसान नहीं होता कि सूर्य या चंद्र ग्रहण क्या है?

सीडी में इसे एनिमेशन के माध्यम से बताया गया है। इसी तरह हिन्दी के लिए 'मात्रा की यात्रा' शीर्षक से सीडी तैयार की गई है। इसमें बताया गया है कि किस तरह मात्राएँ अक्षरों को शब्दों में तब्दील कर देती हैं।
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