दवाइयों के साइड इफेक्ट्स का पता अब मनुष्यों पर उनके प्रयोग से पहले ही लगा लिया जाएगा। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसा कम्प्यूटर आधारित सिस्टम तैयार किया है जो मनुष्यों पर दवाइयों के साइड इफेक्ट्स की जानकारी देगा। इससे फायदा यह होगा कि साइड इफेक्ट्स का पहले से पता लग जाने के कारण उनके फार्मूले में आवश्यक फेरबदल करना आसान हो जाएगा।
किसी भी नई दवाई का प्रयोग पहले चूहों या बंदरों पर करके देखा जाता है। जानवरों पर प्रयोग के बाद इन्हें मनुष्यों पर आजमाकर देखा जाता है। इसके बाद यदि कोई साइड इफेक्ट सामने आता है तब उसके फार्मूले में बदलाव किया जाता है। लेकिन अब जानवरों और मनुष्यों पर दवाई का प्रयोग करने से पहले उसे कम्प्यूटर परीक्षण से गुजरना होगा।
सेन डिएगो स्थित कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया यह कम्प्यूटर मॉडल किसी नई दवाई से होने वाले हर तरह के साइड इफेक्ट के बारे में जानकारी देता है। इस परीक्षण में टेमोक्सीफेन को भी शामिल किया जा रहा है। इस दवाई का उपयोग ब्रेस्ट कैंसर के अधिकांश मामलों में किया जाता है।
ऐसे काम करता है मॉडल
यूनिवर्सिटी की टीम के प्रमुख और फार्मेकोलॉजी के प्रोफेसर फिलिप बोर्न और सेन डिएगो सुपर कम्प्यूटर सेंटर के ली जेई द्वारा तैयार किया गया कम्प्यूटर मॉडल किसी भी दवाई में शामिल सभी तत्वों के मॉलीक्यूल का अलग-अलग परीक्षण करता है।
कम्प्यूटर सभी के त्रिआयामी हजारों स्ट्रक्चर बनाता है और उन्हें मनुष्यों के शरीर में मौजूद प्रोटीन वगैरह से क्रिया करके देखता है कि किस तत्व का शरीर के किस भाग पर नकारात्मक असर हो सकता है। ये सभी तत्वों की अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करता है जिसका परीक्षण करके वैज्ञानिक साइड इफेक्ट्स का पता लगा सकते हैं।
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