अमेरिकी वैज्ञानिक इन दिनों दुनिया के सबसे छोटे कम्प्यूटर को विकसित करने में लगे हुए हैं। नैनोमैकेनिकल ऐसा कम्प्यूटर होगा जो इलेक्ट्रॉनिक्स के बजाय अस्थित सूक्ष्म उपकरणों के इस्तेमाल से चलेगा। इसके पार्ट्स इतने सूक्ष्म होंगे कि उन्हें खाली आँखों से नहीं देखा जा सकता।
माना जा रहा है कि इस कदम से कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी के नए युग की शुरुआत होगी। वैज्ञानिकों की यह कोशिश कारगर रही तो कम्प्यूटरों में बिजली की खपत में तो कमी आएगी ही, पारंपरिक कम्प्यूटरों का आकार भी काफी छोटा हो जाएगा।
यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉनसिन में इलेक्ट्रिकल और कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के प्रोफेसर रॉबर्ट ब्लिक कहते हैं कि हमारा मकसद कम्प्यूटिंग एप्लीकेशन के लिए नए तरह का उपकरण तैयार करना है। पारंपरिक उपकरणों में इलेक्ट्रॉन्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो सर्किट में चलते हैं और कम्प्यूटर चिप को सक्रिय करते हैं।
हालाँकि नैनोमैकेनिकल कम्प्यूटर भी इलेक्ट्रॉन्स पर ही निर्भर होंगे, लेकिन वे इलेक्ट्रॉन्स के प्रवाह के लिए ठोस इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के बजाय सूक्ष्म आकार वाले लाखों घूमते पार्ट्स के प्रेशर का इस्तेमाल करेंगे।
बिजली की खपत घटेगी - ब्लिक ने बताया कि नैनोमैकेनिकल चिप बिजली की खपत में कमी लाएगी। ये 500 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा तापमान में परफार्म कर सकेंगी। वे कहते हैं कि अमेरिका में कुल एनर्जी का 15-20 प्रतिशत कम्प्यूटरों को ऑपरेट करने और उन्हें ठंडा रखने में खर्च होता है।
हमारा मकसद ऊर्जा खपत की समस्या से निजात दिलाना भी है। यही नहीं, इन चिप की मदद से पोर्टेबल कम्प्यूटर बनाने में भी मदद मिलेगी और लेपटॉप में बैटरी जल्द खत्म हो जाने की समस्या भी बहुत हद तक दूर हो सकेगी।
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