लर्निंग जोन | प्रोडक्ट वॉच | मोबाइल मेनिया | आईटी खबर
मुख पृष्ठ » खबर-संसार » आईटी » लर्निंग जोन » आज भी घनघनाता है बेसिक टेलीफोन
Feedback Print Bookmark and Share
 
-राजीव शर्मा

ND
ND
बेशक आज युवाओं को मोबाइल फोन के सामने और कुछ नजर नहीं आता हो लेकिन यह भी सच है कि आज भी बेसिक टेलिफोन घरों और दफ्तरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। घर के हर सदस्य के पास मोबाइल फोन होने के बावजूद भी एक बेसिक टेलिफोन हर घर में मौजूद रहता है। बेसिक टेलिफोन के बिना घर-दफ्तर में जैसे कुछ कमी-सी लगती है।

टेलीफोन के जनक एलेक्जेंडर ग्राहम बेल अगर आज जिंदा होते तो मोबाइल फोन के इस दौर में भी मेजों पर रखे बेसिक टेलीफोन को देखकर जरूर खुश होते। मोबाइल फोन की तमाम सुविधाओं और 'फंक्शंस' के बावजूद अब भी लोगों ने अपनी मेजों पर बेसिक फोन को जगह दी हुई है। नेटवर्क लैंड लाइन का हो या वायरलेस वाला, लेकिन इतना तो पक्का है कि ये बेसिक फोन बहुत-से लोगों के लिए आज भी उपयोगिताओं का 'बेस' साबित हो रहे हैं। जहाँ एक ओर इनसे फोन की सेवा मिलती है, वहीं ये फोन किसी सजावटी वस्तु का विकल्प भी पूरा कर देते हैं। यानी जरूरत भी और खूबसूरत भी। इनका प्रयोग कर रहे लोगों का भी यही कहना है कि बेसिक फोन मोबाइल फोन के मुकाबले में कहीं ज्यादा सुविधाजनक रहते हैं और रखे हुए भी अच्छे लगते हैं। इसके अलावा इनके इधर-उधर गुम होने का डर भी नहीं रहता।

अगर आप थोड़ा-सा भी ध्यान दें तो पाएँगे कि बेसिक फोन आज भी कार्यालयों, दुकानों और घरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। जिन सरकारी-गैर सरकारी कार्यालयों में दिन-रात फोन का उपयोग किया जाता है, वहाँ तो लगभग अनिवार्य रूप में बेसिक फोन का ही इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि कर्मचारियों को हर वक्त अपनी जगह पर ही फोन मिल जाता है। कर्मचारियों की सीट भले ही इधर से उधर हो जाए लेकिन फोन की जगह वही रहती है।

इसके अलावा छोटे-छोटे कार्यालयों में बेसिक फोन इसलिए भी इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इससे ऑफिस का 'लुक' आ जाता है। अशोक विहार में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने वाले विनीत गुप्ता के अनुसार, 'हमने अपने ऑफिस में बेसिक फोन केवल इसलिए ही लगवा रखे हैं क्योंकि इन फोन से ही ऑफिस ऑफिस जैसा लगता है। जब तक मेज पर एक-दो फोन न रखे हों, तब तक लगता ही नहीं कि हम किसी ऑफिस में बैठे हैं। हर रोज 20-30 अनजान लोग ऑफिस में आते हैं। अब उनके सामने मेज पर मोबाइल फोन रखना तो अक्लमंदी नहीं होगी। किस का क्या भरोसा उठाकर ही ले जाए। बेसिक फोन के संबंध में यह डर भी नहीं रहता।'

घर में बेसिक फोन के इस्तेमाल के बारे में रोहिणी निवासी विजया सिंघल कहती हैं कि इससे बहुत आसानी हो जाती है। वैसे तो आजकल घरों में मोबाइल फोन भी रहता है, लेकिन उसे बच्चे यहाँ-वहाँ रख देते हैं। बाद में जरूरत पड़ने पर मिलता ही नहीं। हमारे यहाँ भी कई बार ऐसा हो चुका है। लेकिन एक ही जगह रहने के कारण बेसिक फोन के साथ ऐसी दिक्कत नहीं होती। रेफ्रिजरेटर, म्यूजिक सिस्टम और टीवी वगैरह के लिए भी तो एक ही जगह निश्चित रहती है। इसके अलावा बेसिक फोन ड्राइंग रूम वगैरह में रखा हुआ सुंदर भी लगता है। मोबाइल फोन चाहे कितना भी बढ़िया या महँगा क्यों न हो वह बेसिक फोन की जगह पूरी नहीं कर पाता। कम से कम मेरा तो यही मानना है।

बेसिक फोन कलात्मक और 'एंटिक' चीजों के शौकीन लोगों के शौक को भी पूरा कर रहा है। इन कला प्रेमियों की कोशिश यही रहती है कि हमारे घरों में रखे फोन भी विशेष प्रकार के हों। अपने इस शौक के लिए वे मुँहमाँगी कीमत देने को भी तैयार हो जाते हैं। ऐसे ही कई लोगों ने अपने घरों में 'वुडन वॉल फोन विद क्लॉक, 'मोनार्क वुडन', 'कैंडल स्टिक', 'एफिल टॉवर', 'डेनिश', 'बेल्जियन', 'सिमंस ब्रदर्स', 'ग्रे पे फोन स्टेशन, 'नॉवल्टी, 'प्रिंसेज' या 'केलॉग' जैसे फोन रखे हुए हैं। ये फोन काम में भले ही आधुनिक फोन जितने अच्छे न हों लेकिन दाम और शान में उनसे बहुत आगे हैं।
संबंधित जानकारी खोजें