गरिमा माहेश्वरी कुछ सालों पहले तक लोगों को एक मीटिंग के लिए लंबा सफर तय करके जाना पड़ता था या अलग-अलग स्थानों के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को एक जगह बैठा शिक्षक नहीं पढ़ा पाता था। ऐसी ही कई परेशानियों का हल है वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग।
वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग का ज़्यादा उपयोग दफ्तरों में देखा गया है। इसकी मदद से एक दफ्तर में बैठे लोगों के साथ कहीं दूर, किसी दूसरे दफ्तर में बैठे लोग आसानी से वीडियो कॉन्फ्रेंन्सिंग के माध्यम से बात कर सकते हैं।
यह एक टेलिकम्यूनिकेशन तकनीक है जिसकी मदद से दूर स्थित स्थानों के बीच भी ऑडियो और वीडियो का आदान-प्रदान किया जा सकता है। यह तकनीक किसी से फोन पर बात करने जैसी ही है लेकिन फर्क बस इतना है कि यहाँ आप सुनने के साथ चीजें देख ओर दिखा भी सकते हैं। | | कुछ सालों पहले तक लोगों को एक मीटिंग के लिए लंबा सफर तय करके जाना पड़ता था या अलग-अलग स्थानों के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को एक जगह बैठा शिक्षक नहीं पढ़ा पाता था। ऐसी ही कई परेशानियों का हल है वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग...
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इस तकनीक को ज़्यादातर कॉन्फ्रेन्स के लिए ही उपयोग में लाया जाता है जिसमें कुछ लोगों का समूह शामिल होता है। वीडियो और ऑडियो के साथ ही इस तकनीक के जरिए फाइल या फिर कोई और जानकारी जिसे कम्प्यूटर पर दिखाया जा सकता है, ट्रांस्मिट की जा सकती हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पहला वीडियो कॉन्फ्रेंन्सिंग सिस्टम टीवी के निर्माण के बाद ही विकसित हो गया था। इस पहले सिस्टम के लिए दो टीवी सेट्स को एक केबल की सहायता से जोड़ा गया था। फिर 1980 में पहला डिजिटल टेलिफोनी सिस्टम बनाया गया। आईएसडीएन इसी तरह के एक सिस्टम का उदाहरण है।
लेकिन प्रतिदिन होते तकनीकी विकास की वजह से इस तकनीक का प्रयोग होना कुछ कम हो गया है। इसका प्रमुख कारण है उचित दामों पर इंटरनेट की सुविधा मिलना।इंटरनेट के बढ़ते चलन की वजह से, वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग की जगह अब वेब कैम और व्यक्तिगत मैसेंजर ने ले ली है।
वीडियो कॉन्फ्रेंन्सिंग का उपयोग जिन क्षेत्रों में आज भी होता है उनमें से कुछ हैं * शिक्षा * चिकित्सा * कारोबार * कानूनी गतिविधियाँ।
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