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छत्तीसगढ़ में कमल की छटा कायम
भाजपा ने छत्तीसगढ़ में तमाम अटकलों को खारिज करते हुए एक बार फिर अपेक्षित बहुमत हासिल कर लिया और उसे राज्य विधानसभा की 90 सीटों में से 50 पर कामयाबी मिली।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं और भाजपा को जहाँ 50 सीटें, मिलीं वहीं भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए प्रयासरत कांग्रेस को 38 सीटें मिलीं। दो सीटें बसपा को मिली हैं।

कांग्रेस नेता अजीत जोगी ने पार्टी की हार स्वीकार करते हुए कहा हम जनादेश स्वीकार करते हैं और हम सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएँगे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष घनेंद्र साहू ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी अध्यक्ष सोनिया को अपना इस्तीफा भेज दिया है, वहीं भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों की मंगलवार को बैठक हो रही है। इसमें रमनसिंह को विधायक दल का नेता चुने जाने की औपचारिकता पूरी किए जाने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार सिंह 12 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। मुख्यमंत्री रमनसिंह ने पार्टी की जीत के लिए मतदाताओं को धन्यवाद दिया और लगातार दूसरी बार जनादेश मिलने को सरकार की नीतियों की विजय बताया।

सिंह ने कहा यह गाँव के गरीब किसानों की विजय है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भाजपा को जो बढ़त मिली है, वह सरकार के विकास कार्यों के कारण है।

सरकार के कई मंत्री और बड़े नेताओं के चुनाव में पराजित होने के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा इसकी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास की गति को और तेज करना है तथा सरकार का जोर रहेगा कि प्रदेश को देश के सबसे विकसित राज्यों में शुमार किया जाए।

इस बार भी छत्तीसगढ़ में कमोबेश पुरानी स्थिति ही रही। पाँच साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 50 सीटें ही मिली थी, जबकि कांग्रेस को 37 सीटें मिली थी। पिछली बार भी बसपा को दो सीटें मिली थीं। उस बार एक सीट राकांपा को भी मिली थी, लेकिन इस बार उसका खाता नहीं खुल सका। हालाँकि शुरुआती रुझानों में लग रहा था कि उसका खाता खुलेगा।

मतगणना के शुरुआती रुझानों में ऐसा लग रहा था कि दोनों प्रमुख दलों के बीच काँटे की टक्कर है और सदन त्रिशंकु की स्थिति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन बाद में भाजपा के लिहाज से स्थिति अनुकूल होती गई और कांग्रेस पिछड़ गई।
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