तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग ताजा विकास है जो कि इन दिनों युवा वर्ग में खासा लोकप्रिय हो रहा है। पेट्रोलियम इंजीनियरिंग पेट्रोलियम की खोज तथा उत्पादन प्रक्रिया में संलग्न रहते हैं, जिसे ऊर्जा क्षेत्र अपस्ट्रीम एंड कहा गया है।
इसके अध्ययन क्षेत्र में अर्थशास्त्र, भूगोल, भू-रसायन, भू-अभियांत्रिकी, भू-भौतिकी ऑइल ड्रिलिंग, जियोपोलिटिक्स, नॉलेज मैनेजमेंट, सीसमोलॉजी, टेक्टो निक्स, थर्मोडायनामिक्स, वेल लागिंग, वेल कॅम्पलिशन ऑइल एंड गैस प्रोडक्शन, रिजरवायर डेवलपमेंट तथा पाइप लाइन जैसे विस्तृत विषय शामिल हैं।
नई प्रौद्योगिकी के विकास के साथ ही एक्सट्रेक्शन प्रोसेस में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग अत्यधिक उपयोगी साबित हुई है। कम्प्यूटर मॉडलिंग, मटेरियल तथा सांख्यिकी के अनुप्रयोग संभावना विश्लेषण के साथ-साथ हारिजेंटल ड्रिलिंग तथा इनहेंस्ड ऑइल रिकवरी में सुधार ने हाल के दशक में पेट्रोलियम इंजीनियर के टूल बॉक्स में भी सुधार किया है। हमारे यहाँ ऐसे कुछ संस्थान हैं जो पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में बी.टेक/ एम.टेक प्रोग्राम संचालित कर रहे हैं। इन कोर्सो को आईएसएम, ओएनजीसी, आईओसी जैसे पेट्रोलियम संस्थानों के साथ-साथ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी तथा रिसर्च में संलग्न वैश्विक केंद्रों के अकेडेमिक्स तथा रिसर्चर द्वारा पढ़ाया जाता है। | | तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग ताजा विकास है जो कि इन दिनों युवा वर्ग में खासा लोकप्रिय हो रहा है। पेट्रोलियम इंजीनियरिंग पेट्रोलियम की खोज तथा उत्पादन प्रक्रिया में संलग्न रहते हैं, जिसे ऊर्जा क्षेत्र अपस्ट्रीम एंड कहा गया है। |
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कोर्स तथा पात्रता पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के कोर्स अंडरग्रेजुएट तथा पोस्ट ग्रेजुएट दोनों स्तरों पर संचालित किए जाते हैं। किसी अन्य इंजीनियरिंग डिग्री पाठ्यक्रम की तरह ही पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में बी.टेक के चार वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र तथा गणित विषयों में 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। आमतौर पर प्रवेश सीबीएसई की एआईईईई परीक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर दिया जाता है। पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में एम.टेक का कोर्स इंडियन स्कूल ऑफ माइंस यूनिवर्सिटी, धनबाद तथा इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी (आईपीटीजी) गाँधीनगर द्वारा संचालित किया जाता है।
यह पाठ्यक्रम पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल, केमिकल तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए खुला है। जो पेट्रोलियम इंजीनियरिंग स्नातक नहीं हैं, उन्हें कुछ परिचयात्मक प्रश्नपत्र देने होते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स पूरा करने के बाद इस क्षेत्र में पीएचडी भी की जा सकती है। हालाँकि यह बहुत कठिन है, लेकिन यह मेहनत का मीठा फल दिलवाने वाली उपाधि है।
कार्य क्षेत्र मूल रूप से पेट्रोलियम इंजीनियर का काम पेट्रोलियम भंडार को न्यूनतम नुकसान पहुँचाते हुए किफायती तथा सुरक्षित तरीके से पेट्रोलियम को निकालकर सतह तक लाना होता है। इसकी अन्य गतिविधियों में मटेरियल रिसोर्स मैनेजमेंट, कांट्रेक्टर रिलेशनशिप और ड्रिलिंग स्टाफ का पर्यवेक्षण भी शामिल है। वे विभिन्ना क्षेत्रों में इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, ठेकेदारों और ड्रिलिंग स्टाफ के साथ मिलकर काम करते हैं।
स्त्रोत : नईदुनिया अवसर
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