कार्य की प्रकृति अपस्ट्रीम क्षेत्र में जिस प्रकृति का कार्य किया जाता है, उसमें तेल की संभावना और तेल तथा गैस की मौजूदगी के लिए परीक्षण करना तथा हाइड्रोकार्बन अन्वेषण के लिए द्विआयामी और त्रिआयामी भूकम्पीय आँकड़े प्राप्त करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करना शामिल है। यह कार्य भूगर्भशास्त्रियों द्वारा परिष्कृत प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर संपन्न किया जाता है, जिसमें जियो फिजिसिस्ट और इंजीनियर महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
करियर विकल्प पेट्रोलियम और ऊर्जा उद्योगों में भूगर्भशास्त्रियों, जियो फिजिस्ट और पेट्रोलियम इंजीनियरों के लिए अपस्ट्रीम गतिविधियों में केमिकल, मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल तथा इंस्ट्रुमेंटेशन तथा प्रोडक्शन इंजीनियरों के लिए डाउनस्ट्रीम गतिविधियों में करियर विकल्प उपलब्ध है।
इन इंजीनियरों की खासी माँग है और इन्हें पेट्रोलियम उत्पादन कंपनियों (तेल क्षेत्र में काम करने पर भरपूर वेतन मिलता है), कंसलटिंग इंजीनियरिंग कंपनियों, कुओं की खुदाई करने वाली तथा जाँच कंपनियों के साथ-साथ ओएनजीसी इंडियन ऑइल, ऑइल इंडिया, भारत पेट्रोलियम, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम तथा रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स के अलावा रिसर्च और शैक्षणिक संस्थानों में आकर्षक वेतनमान पर रोजगार प्रदान किया जाता है।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिए जाने के साथ ही इस उद्योग में नियुक्त कई पर्यावरण इंजीनियरों की भूजल तथा वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं को निपटाने में आवश्यकता होगी। इसके साथ ही पेट्रोकेमिकल जैसे सहयोगी उद्योगों में भी इंजीनियरों के लिए करियर निर्माण के अनुपम अवसर निर्मित होते जा रहे हैं।
पारिश्रमिक चूँकि पेट्रोलियम उद्योग पूँजीगत उद्योग है, इसलिए इस क्षेत्र में पैसों की कोई कमी नहीं है। समुद्र के अंदर तेल कूपों पर कार्यरत पेट्रोलियम इंजीनियर छः लाख से लेकर बारह लाख रुपए प्रति वर्ष कमाते हैं। जो लोग अनुसंधान और अन्वेषण में संलग्न हैं, उन्हें आकर्षक वेतन के साथ आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा जैसे लाभ प्रदान किए जाते हैं।
स्त्रोत : नईदुनिया अवसर
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