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खेल में चमकदार भविष्य
घरेलू स्तर पर कई टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं जो खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने की योग्यता प्रदान करते हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा आरंभ की गई रणजी ट्रॉफी और दुलीप ट्रॉफी के रास्ते खिलाड़ी टेस्ट और एक दिवसीय मैचों में प्रवेश कर रन के साथ धन बटोरते हैं।

बेजोड़ बिलियर्ड
माइकल फरेरा और गीत सेठी ने बिलियर्ड में विश्व विजेता बनकर इस विशिष्ट खेल को अपना करियर बनाया। पहले बिलियर्ड की सुविधाएँ विशिष्ट क्लबों, स्नूकर तथा बिलियर्ड एसोसिएशन में उपलब्ध थी, लेकिन आज पूरे देश में स्नूकर हाउस और बिलियर्ड रूम खुल गए हैं, जहाँ बिलियर्ड खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर करियर की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं। उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुँचाने में द बिलियर्ड एवं स्नूकर फेडरेशन द्वारा नियमित रूप से आयोजित चैंपियनशिप का योगदान महत्वपूर्ण है।

घुड़सवारी, सब पर भार
भारत में घुड़सवारी की परंपरा सदियों पुरानी है। अब यह परंपरा खेल का रूप धारण कर चुकी है। भारत में घुड़सवारी को बढ़ावा देने के लिए द इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया का गठन किया गया था। जोधपुर पोलो एंड इक्वेस्ट्रियन इंस्टीट्यूट के साथ अन्य राइडिंग स्कूल्स द्वारा प्रोफेशनल ट्रेनिंग प्रदान की जाती है। यहाँ तक कि इस क्षेत्र में बचपन से करियर बनाने के लिए दिल्ली का चिंल्ड्रन राइडिंग क्लब काम कर रहा है।

नौका पर सवार करिय
इन दिनों भारत में नौकायन अर्थात याचिंग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। विदेशी पर्यटकों द्वारा नौकायन में दिलचस्पी दिखाए जाने से याचिंग के प्रति भारतीय युवाओं की दिलचस्पी भी ब़ढ़ी है। द याचिंग एसोसिएशन ऑव इंडिया भारत में याचिंग चैंपियनशिप और प्रतिस्पर्धा आयोजित कराती है। इसके अलावा देशभर में फैले विभिन्न सैलिग, रोविंग और याचिंग क्लब उभरते याचमैन को प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

चक दे इंडिया बनाम हॉक
भारत में भले ही अँगरेजों ने सबसे पहले हॉकी का आगाज किया हो लेकिन अब इसे हमारे राष्ट्रीय खेल का दर्जा प्राप्त है। हमने 1928 से 1956 के बीच 24 ओलिंपिक मैच खेले और सारे मैच जीते हैं। यहाँ इंडियन हॉकी फेडरेशन शासी निकाय है। 'चक दे इंडिया' फिल्म ने एक बार फिर हॉकी की लोकप्रियता में इजाफा किया है और इसमें करियर बनाने का सिलसिला फिर चल पड़ा है।

भारतीय खेल प्राधिकरण के देशी-विदेशी प्रशिक्षकों द्वारा विभिन्न खेलों के साथ-साथ हॉकी और फुटबॉल में प्रशिक्षण दिया जाता है। हमारे यहाँ हॉकी भले ही फुटबॉल से ज्यादा लोकप्रिय हो, लेकिन बंगाल में फुटबॉल ज्यादा लोकप्रिय है तथा फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मालामाल हैं।
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