- अशोक जोशी
हमारे यहाँ खेल महज मनोरंजन का साधन नहीं रहा है बल्कि बेहतरीन करियर निर्माण का एक शानदार विकल्प भी साबित हुआ है। सचिन तेंडुलकर ने अपनी शतकों से मैदान पर जितनी तालियाँ बटोरी हैं, क्रिकेट और विज्ञापनों से जितना पैसा बटोरा है वह दूसरे करियर से कमाना असंभव भले न हो, लेकिन मुश्किल जरूर है।
खेल में करियर बनाकर करोड़ों कमाने वालों में अकेले सचिन ही नहीं है सानिया मिर्जा, लिएंडर पेस, महेश भूपति, हम्पी और हरिकृष्ण, अभिनव बिन्द्रा, जसपाल राणा, राज्यवर्धन राठौर, अंजलि वेदपाठक और नारायण कार्तिकेयन जैसे अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी भी शामिल हैं। लोगों में इन दिनों खेल में करियर बनाने के प्रति थोड़ी बहुत आशंका है। इसका एक कारण यह भी है कि हमारे यहाँ शुरू से ही ऐसी मान्यता है कि पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब।
सरकारी पहल खेल के माध्यम से करियर बनाने के लिए आखिरकार सरकार को ही कदम उठाना पड़े और देश में खेलकूद की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेल नीति बनाई गई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के युवा मामलों तथा खेल और स्पोर्र्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के गठन ने युवाओं को खेल में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में खासा योगदान दिया है। | | हमारे यहाँ खेल महज मनोरंजन का साधन नहीं रहा है बल्कि बेहतरीन करियर निर्माण का एक शानदार विकल्प भी साबित हुआ है। सचिन तेंडुलकर ने अपनी शतकों से मैदान पर जितनी तालियाँ बटोरी हैं, क्रिकेट और विज्ञापनों से जितना पैसा बटोरा है। |
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व्यक्तिगत गुण खेल के प्रति उत्साही युवा में उनकी पसंद के खेलों के प्रति गहन प्रतिभा होनी आवश्यक है, खेल में सफल करियर बनाने के लिए सही प्रशिक्षक का चयन कर यथोचित प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से छिपी हुई प्रतिभा को खोज निकालना बेहद आवश्यक है। प्रगति पथ पर लगातार आगे बढ़ने और ठहराव के लिए उत्साह एवं स्व-प्रेरणा प्रचुर शारीरिक दमखम, दिमागी चौकसपन तथा अच्छी खेल भावना का होना जरूरी और उपयोगी है।
खेल-खेल में बनाएँ करियर यह सही है कि इन दिनों खेल को एक बेहतर करियर विकल्प की तरह लिया जा रहा है फिर भी यह जरूरी नहीं कि सभी खेलों के खिलाड़ियों का करियर ग्राफ एक साथ ऊपर चढ़े। ऐसे खेल जिनके साथ ग्लैमर जुड़ा है, पैसा भी खूब बरसाते हैं और कुछ खेल ऐसे भी हैं जो खिलाड़ियों को संतुष्टि और पदक भले ही दे, लेकिन पैसों की बरसात करने में उतने कामयाब नहीं होते हैं।
रन बरसाए धन हमारे यहाँ जितना पैसा और प्रसिद्धि क्रिकेट में है, उतनी ख्याति अन्य खेलों को नहीं मिल पाई है। तमाम घोटालों और फिक्सिंग के आरोपों के बावजूद भारत में क्रिकेट के प्रति जो दीवानगी है, देखते ही बनती है। देश के अमूमन सभी शहरों में कोचिंग सेंटर हैं, जहाँ नवोदित खिलाड़ियों को गेंदबाजी और बल्लेबाजी के गुर सिखाए जाते हैं।
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