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इंडस्ट्रीयल सेफ्टी और फायर इंजीनियरिंग
कल का हॉट करियर
- प्रभाशंकर उछान

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19वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के आगमन के साथ ही औद्योगिक संरक्षा की शुरुआत हुई। 1850 से 1900 के बीच ज्यादातर औद्योगिक देशों ने कारखानों में कार्यरत श्रमिकों के लिए कार्य के घंटे निर्धारित करने के साथ-साथ दुर्घटनाओं के मुआवजे से संबंधित कानून बनाए।

इस दिशा में ट्रेवलर्स इंश्योरेंस कंपनी, अमेरिका के एचडब्ल्यू हेनरिच ने औद्योगिक संरक्षा पर लोकप्रिय पुस्तक लिखी जिसका प्रकाशन मेकग्रॉहिल बुक कंपनी द्वारा किया गया। हेनरिच ने लगभग आठ हजार औद्योगिक दुर्घटनाओं का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला कि ज्यादातर दुर्घटनाएँ असुरक्षित क्रियाओं और असुरक्षित परिस्थितियों के परिणामस्वरूप होती हैं। इनमें से 88 प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण असुरक्षित क्रिया और 10 प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण असुरक्षित परिस्थिति और मात्र 2 प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण प्राकृतिक आपदाएँ हैं।

इन्हीं कारणों को जानने के बाद संरक्षा अधिनियम बनाकर नियोक्ताओं को बेहतर कार्य दशाएँ बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। भारत सरकार ने कारखाना अधिनियम 1948 बनाकर पूरे देश में 1 अप्रैल 1949 से लागू किया जिसका पालन सभी औद्योगिक इकाइयों के लिए अनिवार्य है। इस दिशा में देश-विदेश में प्रयास किए गए जिनमें नेशनल सेफ्टी काउंसिल अमेरिका, रायल सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑव एक्सिडेंट, यूके, नेशनल सेफ्टी काउंसिल, भारत, ब्रिटिश सेफ्टी काउंसिल तथा लांस प्रिवेंशन एसोसिएशन ऑव इंडिया ने औद्योगिक संस्था को बेहतर बनाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।
  19वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के आगमन के साथ ही औद्योगिक संरक्षा की शुरुआत हुई। 1850 से 1900 के बीच ज्यादातर औद्योगिक देशों ने कारखानों में कार्यरत श्रमिकों के लिए कार्य के घंटे निर्धारित करने के साथ-साथ दुर्घटनाओं के मुआवजे से संबंधित कानून बनाए।      


औद्योगिक संस्था के मानकीकरण में भारत मानक संस्थान द्वारा आईएसओ-14000 प्रदान कर इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया गया है। विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में संस्था अधिकारियों की नियुक्ति ने जहाँ अरबों रुपए की संपत्ति को नष्ट होने से बचाया वहीं बहुमूल्य मानवीय जीवन को भी अकाल मौत से सुरक्षित किया है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण हमारा संस्थान बैंक नोट प्रेस है। जहाँ खतरनाक तथा ज्वलनशील रसायनों का प्रयोग किया जाता है।

संरक्षा विभाग की स्थापना से पूर्व यहाँ दुर्घटनाएँ हुई हैं, लेकिन जबसे पृथक से संरक्षा विभागस्थापित कर वरिष्ठ संरक्षा अधिकारी की देखरेख में संरक्षा कानूनों का कार्यान्वयन किया गया है, न केवल दुर्घटनाएँ थम गई हैं, बल्कि लगातार कई वर्षों से दुर्घटना रहित उत्पादन कर बैंक नोट प्रेस अखिल भारतीय स्तर पर संरक्षा पुरस्कार प्राप्त करता आ रहा है।
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