* एडमिनिस्ट्रेटिव डाइटिशियंस : वृहद स्तर पर भोजन निर्माण योजना में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इनके द्वारा स्कूलों, कैंटीनों आदि में भोजन निर्माण प्रक्रियाओं को मानिटर किया जाता है। अपने विभाग की संपूर्ण जिम्मेदारी इन पर होती है तथा यह सामग्री चयन, प्रशिक्षण, बजट, उपकरणों की खरीदी, सुरक्षा विनियमों की जाँच तथा अभिलेखों के रखरखाव में सक्रियता से हिस्सा लेते हैं।
* क्लिनिकल डाइटिशियंस : मुख्यतः यह हेल्थ केयर इंस्टीट्यूट्स, हॉस्पिटल्स और नर्सिंग होम्स से संबद्ध होते हैं। रोगियों के पोषण की आवश्यकताओं के अनुरूप यह डाइट चार्ट तैयार करते हैं और डाइटरी थैरेपी के परिणामों को मानिटर करते हैं।
* रिसर्च डाइटिशियन : इनके द्वारा हेल्दी और थेरेपेटिक फूड आइटम्स के न्यूट्रिशन क्षेत्र में कार्य किया जाता है। यह शारीरिक रसायनों पर विभिन्न प्रकार के आहारों के प्रभावों का अध्ययन करते हैं। इसके साथ ही यह उच्च विशेषीकृत अनुसंधान जो कि विभिन्न परिस्थितियों तथा वातावरण में जैसे कि अंतरिक्ष यात्रा के लिए आवश्यक पोषण जैसे विषयों पर अनुसंधान करते हैं।
* डायटिक टेक्निशियन : यह डाइटिशियन के पर्यवेक्षण तथा मार्गदर्शन में फूड सर्विस अथवा हेल्थ टीम के सदस्य के रूप में कार्य करते हैं। यह बतौर सदस्य के रूप में डाइटिशियनों के कार्यों में सहायता करते हैं।
कार्य दशाएँ जो डाइटिशियन और न्यूट्रिशियंस हॉस्पिटल अथवा क्लिनिक से संबद्ध होते हैं, आमतौर पर वहाँ नियमित रूप से कार्य करते हैं। कई बार उन्हें छुट्टियों के दिनों में भी काम करना पड़ता है। ऐसे वातावरण में उन्हें रोगियों से प्रत्यक्ष संपर्क कर उन्हें उनकी बीमारी के अनुसार यथोचित आहार लेने की सलाह देनी पड़ती है। कमर्शियल फूड सर्विस में इनकी कार्यावधि सामान्यतः अनियमित होती है।
अनुसंधान संबंधी कार्य प्रयोगशालाओं में किया जाता है जबकि अन्य कार्यों में उनके कार्यस्थल खाद्य पदार्थ निर्माण क्षेत्र के नजदीक होते हैं। कई बार उन्हें गरम वातावरण वाले रसोईघरों में भी काम करना पड़ता है। इसकी अपेक्षा फूड इंडस्ट्री में इनकी कार्य दशाएँ बेहतर होती हैं। कई फूड कंपनियों द्वारा अपने उत्पादों की पोषण गुणवत्ता की जाँच हेतु न्यूट्रिशियन और डाइटिशियनों को नियुक्त किया जाता है। यहाँ इनके द्वारानए उत्पादों तथा मार्केटिंग संबंधित सलाह भी दी जाती है।
इस तरह न्यूट्रिशियन और डाइटिशियन का क्षेत्र अपेक्षाकृत नया होने के बावजूद रुचिकर तथा अच्छी आय का माध्यम बनता जा रहा है। युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी तथा चिकित्सा क्षेत्र में आहार पर ध्यान दिए जाने से उसकी उपयोगिता और भी बढ़ गई है।
स्त्रोत : नईदुनिया अवसर
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