लोक स्वास्थ्य और जन कल्याण के क्षेत्र में डाइट अर्थात आहार की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। अच्छा और संतुलित आहार जीवन की गुणवत्ता को बहुत हद तक उन्नत बनाता है। खान-पान की खराब आदत और अपर्याप्त आहार कई बीमारियों का मूल कारण है। जीवन के आहार तथा पोषण संबंधी पहलुओं से संबंधित है करियर निर्माण का नया क्षेत्र- न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स।
इसके अंतर्गत आहार के विभिन्न घटकों तथा इनकी शरीर के लिए उपयोगिता के बारे में अध्ययन किया जाता है। सही किस्म का भोजन, संतुलित आहार, आवश्यक विटामिन औरलवण आदि की जानकारी तथा उनका अनुप्रयोग ही न्यूट्रिशन और डाइटेटिक्स का आधार है। यह क्षेत्र मेडिसिन, वेटरनरी, एग्रीकल्चर और पब्लिक क्षेत्र से जुड़ा है। इसलिए जीवन के सभी क्षेत्रों में इसकी प्रासंगिकता होने के साथ-साथ करियर निर्माण के अवसर भी भरपूर हैं।
कार्य की प्रकृति एवं उद्देश्य न्यूटिशिनिस्ट और डाइटिशियन का कार्य लोगों को उनके स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए आहार संबंधी जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान करना है। उसका उद्देश्य यही है कि आहार पर उचित नियंत्रण रख कतिपय रोगों से बचा जा सके तथा मौजूदा रोगों को नियंत्रित किया जा सके।
कुछ रोगों से ग्रस्त लोगों के लिए यह आवश्यक होता है कि वे अपनी खान-पान की आदतों पर विशेष ध्यान दें, साथ ही उनसे यह भी अपेक्षित होता है कि वे लिए जा रहे आहार के प्रति सावधानी बरतें। इससे उन्हें अपनी बीमारी का मुकाबला करने में मदद मिलती है तथा सही आहार लेते रहने से उनका स्वास्थ्य स्थिर रहता है अथवा वे शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते हैं।
इस दृष्टि से डाइटिशियनों की मुख्य भूमिका लोगों को उनकी आयु, रुग्णता अथवा कार्यप्रणाली के आधार पर आहार योजना बनाने में मदद करना है। न्यूट्रिशिनिस्टों द्वारा व्यक्तिगत तथा सामूहिक परामर्श दिया जाता है तथा अस्पतालों, स्कूलों तथा होटलों आदि में फूड सेवा प्रणाली स्थापित की जाती है।
डाइटिशियनों की भूमिका आमतौर पर डाइटिशियन शिक्षा, अनुसंधान, प्रशासन तथा क्लिनिकल/ कम्युनिटी डाइटेरिक्स में सुविज्ञता प्राप्त होते हैं। इनकी भूमिकाएँ निम्नानुसार वर्गीकृत की जा सकती हैं-
स्त्रोत : नईदुनिया अवसर
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