डाइटीशियन के रूप में करियर बतौर डाइटीशियन अस्पतालों, नर्सिंग होम और स्पेशल क्लिनिकों पर जहाँ रोगियों के लिए व्यक्तिगत आहार योजना बनाई जाती है, करियर बनाया जा सकता है। यह कार्य जितना आसान दिखाई देता है वास्तव में उतना आसान नहीं है, क्योंकि इस तरह की योजना बनाते हुए विभिन्न क्लिनिकल घटकों को ध्यान में रखना होता है, साथ ही रोगियों की जीवनशैली, खान-पान की आदतों, सामाजिक संगठन, चयापचय आदि पर भी विचार करना होता है।
इसके अलावा सुरक्षा संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, आवासीय विद्यालयों, कारखानों तथा बड़े कैंटीनों में ज्यादा मात्रा में बनाए खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए भी डाइटीशियन की आवश्यकता होती है।
यहाँ डाइटीशियनों द्वारा किचन स्टाफ को आवंटित बजट में स्वादिष्ट तथा पौष्टिक आहार बनाने में मदद की जाती है। इन दिनों फिटनेस सेंटर, हेल्थ क्लबों और स्पा के प्रति सभी वर्गों का रुझान बढ़ा है। इन सेंटरों पर जहाँ फिजिकल इंस्ट्रक्टर व्यक्तिगत स्वास्थ्य का खयाल रखते हैं तो डाइटीशियन वजन तथा फिटनेस स्तर को बनाए रखने के लिए डाइट अर्थात आहार संबंधी परामर्श देने के लिए नियुक्त किए जाते हैं।
फिल्मी सितारों, नेताओं, खिलाड़ियों और सेलिब्रिटीज द्वारा अपने आपको चुस्त बनाए रखने के लिए डाइटीशियनों की सलाह ली जाती है। इससे भी इस क्षेत्र में अवसर बढ़े हैं। स्टार होटलों में भी डाइटीशियनों की सेवाएँ ली जाती हैं। यहाँ वे शेफ की मदद से ग्राहकों के लिए संतुलित आहार चार्ट तैयार करते हैं। वे यह सुनिश्चित करने में भी मदद करते हैं कि ग्राहकों को परोसा जा रहा भोजन न केवल खाने लायक है बल्कि पौष्टिक भी है। आज के जमाने में डिब्बाबंद और रेडी-टू-इट खाद्य पदार्थों का भारी चलन है।
पिज्जा हट और जंक फूड के पार्लर सारे देश में छाए हुए हैं। यहाँ दाम की प्रतिस्पर्धा के साथ ही ग्राहकों को अच्छी गुणवत्ता और उचित कैलोरी आहार देने के दावे किए जाते हैं। इन सभी क्षेत्रों में डाइटीशियनों के लिए अच्छी संभावनाएँ हैं। इसके अलावा जनता को संतुलित आहार लेने तथा कुपोषण से बचने की सलाह देने वाली सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों के दरवाजे भी डाइटीशियनों के लिए खुले हैं। यही नहीं, इस क्षेत्र में रिसर्च और शिक्षण भी किया जा सकता है।
टीवी के लिए डाइट प्रोग्राम तैयार किए जा सकते हैं या अखबारों में नियमित कॉलम भी लिखे जा सकते हैं। आज की युवा पीढ़ी में जिस तरह स्वस्थ रहने के प्रति जागरूकता बढ़ी है, इन विषयों पर लिखी गई पुस्तकों के प्रति रुझान भी बढ़ा है। इतना ही नहीं, पर्याप्त अनुभव के बाद डाइटीशियन अपनी निजी प्रैक्टिस आरंभ कर अस्पतालों, हैल्थ क्लबों, स्पोर्ट्स क्लबों में विजिट कर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। स्त्रोत : नईदुनिया अवसर
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