- अशोक जोशी
अब यह बात एकदम साफ हो चुकी है कि आहार में बदलाव या यूँ कहिए संतुलन कई बीमारियों को नियंत्रित कर सकता है। शरीर को निरोगी बनाए रखने के लिए माइक्रो न्यूट्रिएंट्स आवश्यक है। लेकिन इसकी मात्रा कितनी होनी चाहिए, इसका ज्ञान भी जरूरी है।
कुछ खाद्य पदार्थ खाकर बुढ़ापे को थामा जा सकता है तो कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे भी हैं जिन्हें निश्चित मात्रा से कम या ज्यादा खाने से शरीर का भूगोल बिगड़ सकता है। नमक और शकर ऐसे तत्व हैं, जो निश्चित मात्रा में जरूरी भी हैं। इन सारे प्रश्नों के उत्तर एक डाइटीशियन ही अच्छी तरह से दे सकता है।
शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए उचित आहार तथा उसकी उचित मात्रा का निर्धारण करने के लिए इन दिनों डाइटीशियन हमारी बहुत सहायता कर रहे हैं। बच्चों, बूढ़ों, कुछ खास रोगों जैसे मधुमेह, हृदय रोग, गुर्दा रोग से पीड़ित रोगियों को डाइटीशियन की आवश्यकता होती है। संतुलित आहार से शरीर को स्वस्थ बनाने का जिम्मा डाइटीशियन पर होता है।
क्या अंतर है डाइटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट में कई लोग डाइटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट को एक ही मानने की भूल कर बैठते हैं। हालाँकि देखने में दोनों ही कार्य एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटीशियन में अंतर होता है। डाइटीशियन स्वास्थ्यकर खान-पान आदतों का मार्गदर्शन देते हैं तथा आहार नियंत्रणों, फिटनेस, तनाव स्तर आदि के आधार पर व्यक्तिगत आहार योजना तैयार करते हैं। | | अब यह बात एकदम साफ हो चुकी है कि आहार में बदलाव या यूँ कहिए संतुलन कई बीमारियों को नियंत्रित कर सकता है। शरीर को निरोगी बनाए रखने के लिए माइक्रो न्यूट्रिएंट्स आवश्यक है। लेकिन इसकी मात्रा कितनी होनी चाहिए, इसका ज्ञान भी जरूरी है। |
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दूसरी तरफ न्यूट्रिशियन मानवों पर आहार के प्रभावों तथा पकाने/ परोसने पर आहार पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करते हैं। न्यूट्रिशियन का काम मुख्यतः बीमारियों को टालना और बीमारी के पश्चात रोगियों को यह सलाह देकर फिट बनाना है कि रिकवरी की रफ्तार बढ़ाने के लिए उन्हें क्या खाना चाहिए। क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर इन दोनों से अलग होते हैं, जो किसी व्यावसायिक आहार उद्योग में कार्य करते हुए वहाँ बनने वाले खाद्य पदार्थों की स्वच्छता, पौष्टिकता, पोषक तत्वों की समुचित मात्रा तथा सरकारी मापदंडों के अनुसार उनके निर्माण/ पैकिंग आदि पर ध्यान देते हैं।
स्त्रोत : नईदुनिया अवसर
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