व्यावहारिक परेशानियों का सामना करते हुए उससे निपटने से जो अनुभव प्राप्त होता है, वह काम में सतत सुधार लाता है। इससे कार्य परिष्कृत होता है, जो अंततः सफलता प्रदान करता है। इस व्यवसाय में आप कागज पर शानदार डिजाइन उकेर सकते हैं। लेकिन यदि आपको यह पता नहीं है कि उसे कार्यरूप में किस तरह परिणित करना है या आपको यह पता नहीं कि इसको तैयार करने की लागत क्या आएगी तो इससे समस्याएँ और भी बढ़ जाएँगी।
किसी घर की आंतरिक सज्जा, दफ्तर का लुक और रेस्टॉरेंट की रौनक देखने में जितनी आकर्षक लगती है, उसे उस लायक बनाना बेहद तनावभरा काम है। इसे निष्पादित करने में खूब पसीना बहाना पड़ता है और घंटों माथापच्ची करनी पड़ती है। इंटीरियर डिजाइनर दफ्तर में योजना या डिजाइन बनाते हैं और साइट पर उसका कार्यान्वयन देखते हैं।
ऐसे में उस पर ग्राहक की पसंद और बजट दोनों का ध्यान रखना पड़ता है। इसके अलावा टाइम मैनेजमेंट तीसरा घटक होता है, जो इंटीरियर डिजाइनर की सफलता का निर्धारण करता है। ऐसी स्थिति में वही इंटीरियर डिजाइनर सफल माना जाता है, जो कम कीमत में अच्छा काम समय पर पूरा कर देता है और यह खूबी खास लोगों में ही होती है।
इंटीरियर डिजाइनर केवल अपना ही काम नहीं करते, बल्कि दूसरों से भी काम लेते हैं। उन्हें श्रमिकों और क्राफ्ट्समैन से काम लेने की कला आना चाहिए और ग्राहकों, सहयोगियों और मटेरियल सप्लायरों के बीच समन्वय स्थापित करने का गुण भी होना चाहिए। कई इंटीरियर डिजाइनर क्षेत्र विशेष में सुविज्ञता हासिल कर सफलता प्राप्त करते हैं। इसके लिए इनमें से किसी भी विशेष क्षेत्र का चयन किया जा सकता है- * कॉर्पोरेट अथवा कमर्शियल इंटीरियर्स इसमें रिटेल आउटलेट्स, कमर्शियल स्पेस, ऑफिस आदि शामिल हैं। * रेसिडेंशियल इंटीरियर्स। * डिजाइनर फर्मों में डिजाइनर के रूप में काम करना। * डिजाइनर फर्मों में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में काम करना।
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