- अशोक जोशी जब कभी हमारे इर्दगिर्द प्राकृतिक आपदाएँ दस्तक देती हैं, हमारे अंदर समाज कार्य करने की भावनाएँ जोर मारने लगती हैं। ये भावनाएँ कुछ दिनों, कुछ सप्ताहों और कुछ महीनों तक जागृत रहती हैं, लेकिन ज्यादातर लोग समाज कार्य को आजीवन अथवा आजीविका के लिए नहीं अपनाते हैं। लेकिन लुभावने गैर-सरकारी संगठनों की अच्छी कार्यदशाओं और बेहतर वेतनमानों ने समाज कार्य को न केवल लाभकारी करियर विकल्प बना दिया है, बल्कि अब इससे अच्छी आय भी होने लगी है।
जहाँ तक करियर के प्रति जागरूकता का प्रश्न है, समाज कार्य ऐसा क्षेत्र है जिसके बारे में लोग अभी पूरी तरह जागरूक नहीं हैं। इसकी अवधारणा के प्रति अनभिज्ञता ही इसे करियर विकल्प के रूप में स्थापित नहीं कर पाई है। या तो समाज कार्य को आमतौर पर स्वैच्छिक सेवा के रूप में ग्रहण करते हैं अथवा कम पारिश्रमिक वाला क्षेत्र माना जाता है। फिर भी हालिया वर्षों में समाज कार्य के अध्ययन कार्यक्रमों ने इस धारणा को बदला है।
बढ़े रहे हैं अवसर और विकल्प पिछले दशक से समाज कार्य के स्वरूप में बदलाव परिलक्षित होने लगा है। समाजसेवा से संबंधित मास्टर्स इन सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) जैसे अध्ययन पाठ्यक्रमों की उपलब्धता बढ़ी है। यह पाठ्यक्रम मल्टी-डिसिप्लिनरी है जिसमें मनोविज्ञान, चिकित्सीय सहायता, श्रम कल्याण, परिवार एवं बाल कल्याण के साथ-साथ शहरी विकास जैसे व्यापक विषयों को शामिल किया गया है। | | जब कभी हमारे इर्दगिर्द प्राकृतिक आपदाएँ दस्तक देती हैं, हमारे अंदर समाज कार्य करने की भावनाएँ जोर मारने लगती हैं। ये भावनाएँ कुछ दिनों, कुछ सप्ताहों और कुछ महीनों तक जागृत रहती हैं, लेकिन ज्यादातर लोग समाज कार्य को आजीवन नहीं अपनाते हैं। |
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क्लिनिकल कोर्स जो लोग मनोविज्ञान और चिकित्सीय सहायता की अर्हता रखते हैं, उनके पास चिकित्सालयों में, न केवल मनोचिकित्सा विभाग में बल्कि अन्य विभागों में भी प्लेसमेंट के ढेर सारे अवसर उपलब्ध हैं। मनोवैज्ञानिक सामाजिक कार्यकर्ता न केवल रोगियों की परिश्चर्या करता है, बल्कि भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से उसके परिवार की देखभाल भी करता है। वह केवल मनोरोगियों को देखता है, जबकि अन्य सारे रोगियों को मेडिकल एंड सोशल वर्कर द्वारा देखा जाता है।
ऐसे रोगी जो गंभीर रूप से कैंसर या एड्स जैसे रोग से ग्रसित होते हैं, उन्हें अवसाद का मुकाबला करने के लिए परामर्श अथवा काउंसलिंग की आवश्यकता होती है। इस तरह की मदद न केवल रोगियों को, बल्कि उनके रिश्तेदारों को भी अपेक्षित होती है। और कभी-कभी ये सामाजिक कार्यकर्ता रोगी-चिकित्सक समीकरण को मजबूत करने की दिशा में आगे कदम रखते हैं।
स्त्रोत : नईदुनिया अवसर
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