मुख्य पृष्ठ > खबर-संसार > करियर > करियर विकल्प
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
सीए बनें - भविष्य सुरक्षित करें
ND
- राजेश सेलोत

आईसीएआई की स्थापना भारत सरकार द्वारा 1949 में की गई। सरकार द्वारा संस्थान को सीए की परीक्षाएँ संचालित करने एवं सीए के लाइसेंस जारी करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। 59 वर्षों के गहरे अनुभव के आधार पर संस्थान द्वारा वर्तमान में एक श्रेष्ठ शिक्षा पद्धति विकसित की गई है जो कि सफलतापूर्वक पूरे देश में लागू है।

सीए की शिक्षा पद्धति वाणिज्य संकाय की अन्य उपाधियों की तुलना में विशेष स्थान रखती है, क्योंकि इसमें सैद्धांतिक परीक्षाएँ तथा प्रेक्टिसिंग सीए के अधीन प्रशिक्षण साथ-साथ चलते हैं। इस शिक्षा प्रणाली से विद्यार्थियों का न केवल सैद्धांतिक ज्ञान बढ़ता है बल्कि उनकी व्यावहारिक योग्यताओं तथा प्रतिभा का उद्भव भी होता है। यही वजह है कि सीए डिग्री को एक संपूर्ण डिग्री माना गया है।

कोई भी विद्यार्थी 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात सीपीटी परीक्षा में शामिल हो सकता है तथा उसके बाद साढ़े तीन वर्षों का व्यावहारिक प्रशिक्षण किसी सीए के अधीन करने के लिए पात्रता रखता है। इसी दौरान उसे पीई-2 की परीक्षा उत्तीर्ण करना होती है जिसके बाद फाइनल एक्जाम उत्तीर्ण करके तथा 250 घंटों की अनिवार्य कम्प्यूटर ट्रेनिंग करने के पश्चात सीए बन सकता है।

संपूर्ण सीए करने में ट्यूशन के अलावा लगभग 25 हजार रुपए से ज्यादा खर्च नहीं आता है जो कि सीए डिग्री की प्रतिष्ठा एवं इसके समकक्ष अन्य किसी भी कोर्सेस के मद्देनजर अत्यंत कम है और इसीलिए गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों के लिए भी सीए पाठ्यक्रम का आकर्षण देखते ही बनता है। यही वजह है कि सीए करने के लिए युवाओं का रुझान पिछले वर्षों में तेजी से बढ़ा है।
  आईसीएआई की स्थापना भारत सरकार द्वारा 1949 में की गई। सरकार द्वारा संस्थान को सीए की परीक्षाएँ संचालित करने एवं सीए के लाइसेंस जारी करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। 59 वर्षों के गहरे अनुभव के आधार पर संस्थान द्वारा एक श्रेष्ठ शिक्षा पद्धती है।      


अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय मानकों के आधार पर सीए कोर्स को लगातार अपडेट किया जाता है यही कारण है कि भारतीय सीए दुनिया के किसी भी मैनेजमेंट एवं अकाउंट विशेषज्ञ के बराबर क्षमता रखता है। वर्तमान में देश में लगभग 1,50,000 सीए हैं तथा 4 लाख विद्यार्थी सीए की विभिन्न परीक्षाओं में शामिल होते हैं। एक सर्वेक्षण के मुताबिक हमारे देश में आने वाले वर्षों में प्रतिवर्ष लगभग 20000 सीए की माँग रहेगी जबकि वर्तमान में लगभग 8000 विद्यार्थी ही प्रतिवर्ष सीए बन पाते हैं।

हमारे देश के कानून के अनुसार किसी भी व्यवसाय या उद्योग की लेखा बहियों का अंकेक्षण करने का वैधानिक अधिकार केवल सीए के पास ही होता है। विभिन्न कानून जैसे आयकर अधिनियम, कंपनी अधिनियम, रिजर्व बैंक अधिनियम आदि के अंतर्गत लेखा बहियों के अंकेक्षण एवं प्रमाणीकरण के अनेक अवसर सीए के समक्ष उपस्थित हैं। इसी प्रकार वित्तीय लेखा बहियों को लिखने, उसमें आधारभूत सुधार करने एवं उनके आंतरिक अंकेक्षण आदि की उज्ज्वल संभावनाएँ सीए के लिए मौजूद हैं।

स्त्रोत : नईदुनिया अवसर
1 | 2  >>  
और भी
चार्टर्ड अकाउंटेंट कैसे बनें
इंफरमेशन मैनेजर बन गए हैं आज के लाइब्रेरियन
भारत और विदेश में भी हैं पीआर
पब्लिक रिलेशन में संभावनाएँ
पब्लिक रिलेशन
बायोइन्फरमेटिक्स के भारत में बढ़ते कदम