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नई दिल्ली। वर्ष 2011 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) और कठिन हो सकती है। जेईई की पात्रता के लिए 12वीं में न्यूनतम 60 फीसद अंक को बढ़ाकर 80-85 फीसद किया जा सकता है।

सरकार ने आईआईटी-जेईई में बदलाव की यह पहल देश में फैल रहे कोचिंग क्लासों के जाल का तिलिस्म तोड़ने तथा 12वीं के अंकों को ज्यादा महत्व देने के मद्देनजर की है। नए प्रावधानों के लागू होने से 12वीं बोर्ड से ध्यान हटाकर सिर्फ जेईई की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों को झटका लगेगा।

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को आईआईटी परिषद की बैठक के बाद बताया- आईआईटी-जेईई में सम्मिलित होने के लिए मौजूदा नियम के अनुसार 12वीं में न्यूनतम 60 फीसद प्राप्तांक होना निर्धारित है। यह स्वीकार्य नहीं है। न्यूनतम प्राप्तांक को बढ़ाकर 80-85 फीसद किया जा सकता है। लेकिन इसका फैसला आईआईटी निदेशकों की गठित कमेटी करेगी। न्यूनतम अंक तय करना मेरे मंत्रालय का काम नहीं है।

उन्होंने कहा कि कोचिंग क्लासों का मुख्य जोर जेईई पर होता है, जिस कारण छात्र 12वीं की मूल पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लेते हैं। लेकिन हम 12वीं बोर्ड परीक्षा को भी बराबर का महत्व देना चाहते हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में सरकार ने 12वीं में दी जाने वाली मेधा छात्रवृत्ति के लिए पारिवारिक आय सीमा में बदलाव कर इसे 2 लाख वार्षिक से बढ़ाकर 4.5 लाख रुपए कर दिया है।

तीन सदस्यीय कमेटी गठित

पाठ्यक्रम तथा आईआईटी-जेईई पद्धति में अपेक्षित सुधार के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। कमेटी तीन महीने में रिपोर्ट देगी। कमेटी में विज्ञान एवं तकनीकी सचिव टी. रामासामी, जैव तकनीकी विभाग के सचिव एमके खान तथा सीएसआईआर के महानिदेशक समीर ब्रह्मचारी हैं। आईआईटी प्रणाली में सुधार लाने के लिए सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक अनिल काकोड़कर की अध्यक्षता में भी एक कमेटी गठित की जाएगी।
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