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दो साल में कुछ भी खर्च नहीं
शिक्षण प्रशिक्षण के लिए तीन हजार करोड़ हुए थे स्वीकृत
-भाषा सिंह
नई दिल्ली। शिक्षकों के शिक्षण-प्रशिक्षण (प्री सर्विस एंड पोस्ट सर्विस ट्रेनिंग) के लिए ग्यारवीं पंचवर्षीय योजना में 3 हजार करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई थी, लेकिन दो साल बीतने पर इसमें से एक भी रुपया नहीं खर्च नहीं हो पाया है।

इसकी वजह शिक्षण-प्रशिक्षण देने वाली सरकारी संस्थाओं की खस्ता हालत है। ये संस्थान इतने बदहाल थे कि राशि को उन पर खर्च करने का फैसला खुद केंद्रीय मानव संसधान विकास मंत्रालय नहीं ले पाया।

नईदुनिया को अपनी पड़ताल में पता चला कि अब जल्द ही यह राशि खर्च होने की उम्मीद है। सरकारी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों की मौजूदा खस्ता हालत के कारणों की पड़ताल करने और सुधार के सुझाव के लिए बनाई गई समिति ने रिपोर्ट तैयार कर ली है।

जल्द ही वह रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी जाएगी। जाँच का जिम्मा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को सौंपा था। सूत्रों के मुताबिक करीब 40 अनुशंसाएँ तैयार की गई हैं, जिनके आधार पर पूरे शिक्षण का ढाँचा ही बदलने की सिफारिश की गई है।

इस समय 700 के करीब सरकारी संस्थानों में शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें 500 जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान, 100 कॉलेज ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, 30 इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी इन एजुकेश तथा 28 राज्यों के राज्य शैक्षिणिक संस्थानों के केंद्र हैं।
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