नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि दसवीं के बोर्ड को वैकल्पिक बनाने के लिए वे जल्द ही शिक्षाविदों की एक समिति गठित करेंगे और पढ़ाई के साथ-साथ कौशल विकास पर भी जोर देंगे।
श्री सिब्बल ने यह भी कहा कि प्रपत्र एवं अनिवार्य शिक्षा विधेयक पारित हो जाने के तीन साल बाद देश में स्कूली शिक्षा की स्थिति काफी हद तक ठीक हो जाएगी। श्री सिब्बल गुरुवार को यहाँ मानव संसाधन विकास मंत्रालय में दिल्ली के करीब 50 पब्लिक स्कूलों के प्राचार्यों से मिलने के बाद पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।
राजी हैं पब्लिक स्कूल
दिल्ली के नामी-गिरामी पब्लिक स्कूलों के प्राचार्यों ने श्री सिब्बल से कहा कि वे दसवीं के बोर्ड को वैकल्पिक बनाने के लिए सहमत हैं। कई स्कूलों के प्राचार्यों ने तो यह भी कहा कि उन्होंने स्कूलों में प्रयोग के तौर पर यह काम दो वर्षों से शुरू भी कर दिया है। अगर कोई बच्चा दसवीं बोर्ड नहीं देना चाहता है और वह उसी स्कूल में ग्यारहवीं में दाखिला लेना चाहता है तो उसे यह छूट दी गई है।
आम लोगों की मदद चाहिए
श्री सिब्बल ने प्राचार्यों से कहा कि वे देश में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार लाना चाहते हैं। इस दिशा में उन्हें आम लोगों की मदद चाहिए। वे जल्द ही एक समिति गठित करने जा रहे हैं, जिसमें प्राचार्यों को शामिल किया जाएगा और उनसे सलाह-मशविरा लिया जाएगा।
11 साल में 4 करोड़
उन्होंने कहा कि उनका जोर कौशल विकास पर रहेगा क्योंकि वर्ष 2020 तक देश में 4 करोड़ 70 लाख अतिरिक्त छात्रों की फौज खड़ी हो जाएगी और उन्हें आज की नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की चिंता है। वे ऐसी व्यवस्था के पक्ष में हैं कि अगर कोई बच्चा दसवीं या बारहवीं में पेशेवर कोर्स करना चाहता है तो उसे उसी विषय में सीबीएसई की डिग्री दी जाए। |