भोपाल। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा 12 जून को आयोजित काउंसलिंग के आधार पर निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में पुनरावंटित की गई सीटों पर छात्रों को प्रवेश नहीं दिए जा रहे हैं। कॉलेजों ने छात्रों को प्रवेश देने से इंकार करते हुए कोर्ट जाने को कह दिया है।
गौरतलब है कि 12 जून को चिकित्सा शिक्षा संचालनालय द्वारा गाँधी मेडिकल कॉलेज में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एमडी, एमएस और एमडीएस की सीटों के पुनरावंटन के लिए काउंसलिंग का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश के निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की 10 एमडी-एमएस और 18 एमडीएस सीटों का आवंटन किया गया था, लेकिन इस काउंसलिंग के आधार पर जिन छात्रों को ये सीटें आवंटित की गई हैं उन्हें निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों ने प्रवेश देने से साफ इंकार कर दिया है। कॉलेज संचालकों ने इन छात्रों को प्रवेश न देते हुए कोर्ट जाने को कहा है।
डॉ. योगेन्द्र सिंह, डॉ. अनुराग जैन, डॉ. दिव्या मिश्रा, डॉ. मल्लिका जैन, डॉ. नीरज छारी आदि ने बताया कि उन्हें 12 जून को निजी मेडिकल कॉलेज में सीटें आवंटित की गई थीं, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। उन्हें फिर से कोर्ट जाने के लिए कहा जा रहा है।
अवमानना की याचिका यह काउंसलिंग २७ मई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए अंतिम आदेश के बाद ही आयोजित की गई थी। छात्रों ने निजी कॉलेजों पर कोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप लगाया है। मेडिकल छात्रों ने कोर्ट में एक अवमानना संबंधी याचिका भी लगाई है।
जूडा ने किया विरोध
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने भी निजी कॉलेजों द्वारा मेडिकल छात्रों को प्रवेश न देने का विरोध किया है। जूडा ने सरकार से इस संबंध में जल्द कदम उठाने की माँग की है। जूडा के प्रदेश संयोजक डॉ. केके प्रजापति ने बताया कि सरकार को एक नियामक आयोग गठित करना चाहिए जो निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की मनमानी पर अंकुश लगाए।
शासन को सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया था, हमने उसका पालन करते हुए काउंसलिंग करा दी। अब निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेज यदि सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने के लिए तैयार नहीं है तो इसमें शासन कुछ नहीं कर सकता। इसके लिए तो सुप्रीम कोर्ट ही कुछ कर सकती है।
- डॉ. वीके सैनी, संचालक, चिकित्सा शिक्षा |