मुख पृष्ठ > खबर-संसार > करियर > समाचार > एमिटी कर रहा है छात्रों को गुमराह
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजिएयह पेज प्रिंट करें
 
एमिटी कर रहा है छात्रों को गुमराह
बगैर यूजीसी मान्यता के चलाया जा रहा है पाठ्यक्रम
हालाँकि सूचना के अधिकार के तहत यूजीसी संयुक्त सचिव केपी सिंह में अपने लिखित बयान में यह भी कहा है कि एमिटी यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश राज्य विधान सभा द्वारा पारित एक निजी विश्वविद्यालय है जो अपने अनुमोदित परिसर नोएडा से विभिन्न वैधानिक परिषदों की अनुमति से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सेक्शन 22 के अन्तर्गत अपने मेन कैम्पस से निर्दिष्ट डिग्रियां प्रदान करन के लिए अधिकृत है।

यहाँ सवाल यह खड़ा होता है कि इस विश्वविद्यालय के पास डिग्री प्रदान करने के लिए यूजीसी रजिस्ट्रेशन के लिए जिस सार्टीफिकेट का होना आवश्यक है वह इनके पास है ही नहीं तो फिर इसकी डिग्रियाँ मान्य कैसे हुईं। एक सबसे अहम बात जो सामने आई है उसके मुताबिक यूजीसी सेक्शन 22 में यह भी शर्त रखा गया है कि किसी भी व्यावसायिक कोर्स चलाने के लिए संवैधानिक प्रपत्र की अनुमति जरूरी होती है और जहाँ एमिटी में चल रहे पाठ्यक्रमों की बात है, यहाँ इसे चलाने के लिए इन शर्तों का पूरा होना जरूरी है। लेकिन यहाँ भी भारत सरकार का संवैधानिक निकाय जो व्यवसायिक कोर्स चलाने की अनुमति प्रदान करता है ''अखिल भारतीय तकनीक शिक्षा परिषद'' एआईसीटीई ने एमिटी को इसकी अनुमति नहीं दी है। सूचना अधिकार के मुताबिक एआईसीटीई ने लखनऊ एमिटी को पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति ही नहीं दी है।

एमिटी लखनऊ को 2005 में मुलायम सिंह सरकार के समय में ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर पाबन्दी लगा दी थी और इसे पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दिया था। एमिटी विश्वविद्यालय का लखनऊ कैम्पस यूजीसी की नजर में आज भी अवैध है। इतना ही नहीं यूजीसी की वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू यूजीसी.एसी.इन पर भी एमिटी विश्वविद्यालय मान्यता प्राप्त कालेज के लिस्ट में नहीं है।

एक आश्चर्यजनक बात और सामने आई कि एमिटी की 2009 के प्रवेश सम्बन्धी वेबसाइट पर आ रहे विज्ञापन जो वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.एमिटी.ईडीयू पर प्राप्त होता है उसके 'गवर्नमेंट रिक्गनाइज्ड' कॉलम में एमिटी विश्वविद्यालय की मान्यता के लिए यूजीसी का मान्यता पत्र का जिक्र किया गया है, जिसे खोलने पर एक हास्यास्पद परिणाम नजर आता है। इस मान्यता पत्र के रूप में वह पत्र खुलकर आता है जिसमे एमिटी के ही जनरल सेक्रेटरी ने सूचना के अधिकार नियम के तहत यूजीसी से यह जवाब माँगा है कि इनका कालेज यूजीसी से मान्यता प्राप्त है या नहीं यूजीसी एक्ट में इसका स्टेटस क्या है।

एमिटी विश्वविद्यालय के फर्जी होने के पीछे उत्तर पदेश सरकार का भी बड़ा हाथ है, क्योंकि यह विश्वविद्यालय यूजीसी मान्यता का फायदा सिर्फ इसलिए उठा रहा है क्योकि इसे उप्र राज्य विधान परिषद की अनुमति यूजीसी सेक्शन 22 के तहत डिग्रियाँ देने का अधिकार प्रदान किया गया है, जबकि आज तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 के प्रावधान के अनुसार आयोग ने एमिटी यूनिवर्सिटी की शैक्षिक व अन्य संसाधनों की उपलब्धता व सुनिश्चितता के लिए अभी तक निरीक्षण किया ही नहीं है।
<< 1 | 2 
संबंधित जानकारी खोजें
और भी
एलएलबी पाठ्यक्रम में दाखिले के निर्देश
सात विषयों की ई-सामग्री तैयार करेगी डीयू
हैदराबाद विश्‍वविद्यालय को मान्यता
रैगिंग के दायरे में नए कृत्य
घर बैठे नहीं होगा कॉलेज व ब्रांच का चयन!
डीम्ड विवि पर फैसला जल्द