- अरविन्द शुक्ला
एमिटी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश का एक ऐसा विश्वविद्यालय है जिसे वर्ष 2005 में ही सर्वोच्च न्यायालय ने अवैध घोषित कर दिया था लेकिन तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार व वर्तमान सरकार के कुछ बड़े नेताओं की साँठ-गाँठ से यह अब तक फल-फूल रहा है और छात्रों व अभिभावकों को गुमराह कर रहा है।
एमिटी विश्वविद्यालय जो यूजीसी यानि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता प्राप्त का दावा करता है, दरअसल यह महज एक छलावा है। सूचना का अधिकार नियम 2005 के तहत एमिटी की यूजीसी से मान्यता को लेकर पूछे गए सवाल में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव ने अपने लिखित बयान में इसका खुलासा किया है कि यूजीसी द्वारा एमिटी विश्वविद्यालय को किसी भी प्रकार की स्वीकृति या मान्यता पत्र नहीं दिया गया है।
एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा यूजीसी का मोनोग्राम से पहले इस्तेमाल किया जाता था उसका अधिकार भी नहीं दिया गया है। एक ओर केन्द्र व राज्य सरकार दोनों के द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए-नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर इनके साँठ-गाँठ से निजी विश्वविद्यालय व शिक्षण संस्थान इसी उच्च शिक्षा को प्रदान करने की आड़ में छात्रों के साथ कितना बड़ा छल कर रहे हैं।
मालूम हो कि एमिटी विश्वविद्यालय का यह सच तब सामने आया जब लखनऊ में प्रोजेक्ट विजय नामक सामाजिक संस्थान के महेन्द्र प्रताप सिंह ने एमिटी विश्वविद्यालय के बारे में इंटरनेट से कुछ जानकारियों लेने की कोशिश की। तभी इंटरनेट पर एमिटी की सचाई सामने आई जो कि हैरानी में डाल देने वाली थी।
एमिटी की वास्तविकता क्या है इसे जानने के लिए महेन्द्र प्रताप सिंह, राधेश्याम सिंह व अभिषेक जो कि प्रोजेक्ट विजय के ही सदस्य हैं, ने सूचना के अधिकार के तहत यूजीसी से एमिटी के मान्यता पर सवाल किया, जिसके जवाब में यूजीसी के संयुक्त सचिव केपी सिंह ने बताया कि इनके द्वारा एमिटी को अब तक कोई भी मान्यता सम्बन्धित पत्र नहीं दिया गया है। इन्होंने यह भी बताया कि एमिटी अपने विज्ञापनों में जिस तरह यूजी सी का मोनोग्राम इस्तेमाल करती थीं उसके खिलाफ भी यूजीसी ने एमिटी को नोटिस जारी की है जिसके बाद एमिटी ने वेबसाइट पर आ रहे विज्ञापनों से यूजीसी लोगों को हटा दिया इनके मुताबिक कोई भी निजी संस्थान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( यूजीसी) का मोनोग्राम इस्तेमाल नहीं कर सकती जिसकी हिम्मत एमिटी ने दिखाई।
यूजीसी के ही एक उच्च अधिकारी से जब इन सभी मामलों पर जानकारियों ली गई। तब उन्होंने बताया कि एमिटी के उस करतूत पर अदालती कार्रवाई भी चल रही है, साथ ही यूजीसी का मोनोग्राम इस्तेमाल करने पर एमिटी के खिलाफ नोटिस भी जारी किया गया है। इन्होंने बताया कि किसी ऐसे विश्वविद्यालय को डिग्री प्रदान करने की अनुमति तभी होती है व उसे मान्यता तभी प्रदान की जाती है जब उसके पास 2एफ तथा 12 बी का सार्टीफिकेट होता है 2एफ सार्टीफिकेट जहाँ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रेशन के लिए होता है वहीं 12 बी मान्यता के लिए जरूरी माना जाता है लेकिन उच्च अधिकारी के मुताबिक यह दोनों सार्टीफिकेट एमिटी विश्वविघालय के पास नहीं हैं। |