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रैगिंग के दायरे में नए कृत्य
यूजीसी ने परिभाषा को और व्यापक बनाया
नई दिल्ली। विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) ने रैगिंग की परिभाषा को संशोधित कर और व्यापक बनाया है। इस अपराध के तहत कई नए कृत्यों को शामिल किया गया है। इसके बाद यह सिर्फ वरिष्ठ छात्रों तक सीमित नहीं होगा।

सिर्फ वरिष्ठ छात्रों द्वारा रैगिंग किए जाने की मान्यता से असहमति जताते हुए यूजीसी ने अपने नए नियमन में कहा है- किसी भी छात्र या छात्रों का कोई व्यवहार (बोलकर या लिखकर या कृत्य) जो किसी नए छात्र या अन्य छात्र के लिए छेड़छाड़ या असभ्य (रुखा या ढीठई) बर्ताव होने वाला हो, रैगिंग के दायरे में आएगा।

यूजीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रैगिंग अपराध के दायरे में यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त आरके राघवन कमेटी के सुझावों के आधार पर किया गया है। उन्होंने बताया कि ऐसा देखा गया है कि रैगिंग में समान बैच के छात्र भी शामिल होते हैं। इसलिए अब यह सिर्फ वरिष्ठ छात्रों का ही काम नहीं रह गया है।

ये माने जाएँगे रैगिंग अपराध

* अकादमिक कार्य पूरा कराने के लिए छात्र/छात्रों से जोर-जबर्दस्ती।

* छात्र/छात्रों द्वारा छात्र/छात्रों की नियमित शैक्षणिक गतिविधि को रोकना या बाधित करना।

* जबरन रुपए की माँग।

* दैहिक प्रताड़ना (यौनाचार, समलैंगिक आघात, कपड़े उतरवाना, कामुक कृत्य या संकेत, शरीर या स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वाले कृत्य)।

* नए या अन्य छात्र से गाली-गलौज करना, गंदे ई-मेल भेजना, सार्वजनिक अपमान।

* प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से विकृत आनंद के लिए किया गया कार्य, जो किसी छात्र के लिए परेशानी का सबब बने।
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