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कुंजी से पढ़कर पास होना अब मुश्किल  Search similar articles
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किताबों को एक तरफ पटक कुंजी या 20 प्रश्न से पढ़कर पास होना अब कॉलेज छात्रों के लिए मुश्किल होगा। नए सत्र से कॉलेजों में शुरू होने वाले सेमेस्टर सिस्टम में ऐसा करना छात्रों को महँगा पड़ सकता है। संभव है कि कुंजी के भरोसे परीक्षा में बैठने वाले छात्र फेल ही हो जाएँ।

दरअसल, नए सत्र से प्रदेश भर के कॉलेजों में लागू होने वाले सेमेस्टर सिस्टम में छात्रों को संबंधित विषय की पूरी किताब पढ़ने के साथ ही 75 फीसदी उपस्थिति जरूरी होगी। ऐसा न करने वाले छात्र फेल हो सकते हैं ।

सेमेस्टर प्रणाली में प्रत्येक विषय के सैद्वांतिक प्रश्नपत्र में 30 प्रतिशत अंक सतत मूल्यांकन के निर्धारित किए गए हैं। शेष 70 फीसदी अंकों का मूल्यांकन विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित सत्रांत परीक्षा के लिए होंगे। यह सतत मूल्यांकन दो चरणों में होगा जो कॉलेज स्तर पर संबंधित शिक्षकों द्वारा किया जाएगा।

प्रश्न पत्र में 20 प्रतिशत वस्तुनिष्ठ, 30 प्रतिशत लघु उत्तरीय तथा 50 प्रतिशत दीर्घ उत्तरीय होंगे। एक विषय में फेल या अनुपस्थित होने वाले छात्रों को एटीकेटी की पात्रता होगी, लेकिन छात्रों को एक विषय में केवल एक अंक का ही कृपांक दिया जाएगा।

अंतिम सेमेस्टर में श्रेणी प्रदान करते समय श्रेणी सुधार के लिए एक कृपांक दिया जा सकेगा। प्रथम व द्वितीय सेमेस्टर में एटीकेटी प्राप्त विद्यार्थी को तीसरे सेमेस्टर में अस्थायी प्रवेश दिया जा सकेगा।

आखिरी सेमेस्टर में छात्रों को संबंधित विषय का प्रेक्टिकल ज्ञान देने के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था होगी। इसके लिए कॉलेज अपने स्तर पर कंपनियों से करार कर छात्रों को इंटर्नशिप के लिए भेजेंगे। किस विषय के लिए कौन सी कंपनी से करार किया जाना चाहिए उच्च शिक्षा विभाग ने इसकी सूची भी कॉलेज प्राचार्यों को सौंप दी है।
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