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प्रकृति भी बरसाती है पैसा  
- अशोक जोश

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प्रसिद्ध वन्यशास्त्री जिमकार्बेट ने 'जंगल लोर' में जो कुछ कहा वह वानिकी के अध्ययन की विशालता को परिभाषित करता है। उन्होंने कहा था कि प्रकृति के अध्ययन की कोई शुरुआत नहीं है तथा इसका कोई अंत नहीं है। हमारे देश के वनों ने प्रकृति की प्रशंसा करने के लिए संपूर्ण जीवनकाल व्यतीत करने तथा प्रकृति पर ही सारा जीवन आलम्बित करने का अवसर प्रदान किया है। यही कारण है कि वन विधा अर्थात्‌ फॉरेस्ट्री और इससे जुड़े क्षेत्रों में करियर बनाने की अपार संभावनाएँ हैं।

जिस तरह से सारी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण से उपजे खतरों से चिंतित है उसे देखते हुए इस समय प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के अध्ययन का महत्व सभी दूर बढ़ा है।

यदि इंडियन फॉस्ेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून के एक अधिकारी की बात मानी जाए तो देश के शीर्षस्थ संस्थानों में आईएफआरआई का शुमार होता है जहाँ फॉरेस्ट्री, वुडन साइंस और टेक्नोलॉजी एंड एनवायरमेंट मैनेजमेंट में एमएससी पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं। वुड साइंस और टेक्नोलॉजी ऐसे विशिष्ट पाठ्यक्रम हैं जो देश में अन्यत्र कहीं उपलब्ध नहीं हैं। इंस्टीट्यूट में प्रत्येक विषय की 29 सीटें हैं, जिन पर अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रवेश दिया जाता है। बीएससी उत्तीर्ण छात्र इस प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं।

फॉरेस्ट्री विषय के अध्ययन में वन्य जीवों का अध्ययन सर्वाधिक आकर्षणयुक्त है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑव इंडिया देहरादून द्वारा सौराष्ट्र विश्वविद्यालय की संबद्धता में वाइल्ड लाइफ साइंस में दो वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट में प्रवेश के लिए न्यूनतम 15 वर्षीय शिक्षण तथा बायोलॉजी विषय में 55 प्रश अंकों के साथ स्नातक उपाधि जरूरी है। इसमें प्रवेश के लिए वेटरनरी साइंस, फॉरेस्ट्री एग्रीकल्चर तथा एनवायरमेंटल साइंसेज की उपाधि भी मान्य है। पेशेवर फॉरेस्टर, जिनकी आयु35 वर्ष से कम है तथा जिनके पास उपयुक्त उपाधि के साथ वाइल्ड लाइफ रिसर्च हेतु एप्टीट्यूड है, वे भी यह कोर्स कर सकते हैं।

सामान्यतः पाठ्यक्रम की शुरुआत एक साल छोड़कर प्रत्येक जुलाई में होती है। इसके लिए समाचारों के अलावा वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की वेबसाइड पर भी विज्ञप्ति जारी की जाती है। इसकी चयन प्रक्रिया सख्त है। इसमें सफलता प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाके साथ-साथ साक्षात्कार में भी अच्छा प्रदर्शन अपेक्षित होता है।

फॉरेस्ट्री पाठ्यक्रमों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑव फॉरेस्ट मैनेजमेंट (आईआईएफएम) की ख्याति भी दूर-दूर तक फैली हुई है। इंस्टीट्यूट द्वारा फॉरेस्ट मैनेजमेंट में दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा के साथ-साथ नौकरीशुदा लोगों के लिए नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट में एम-फिल स्तर के पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं। यहाँ 60 सीटें पीजी डिप्लोमा तथा पोस्ट मास्टर प्रोग्राम की 20 सीटें उपलब्ध हैं जिनमें किसी भी विषय का स्नातक कॉमन एप्टीट्यूट टेस्ट के माध्यम से प्रवेश ले सकता है।
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