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फार्मूला अच्छे अनुवादक बनने का
अच्छा व्यवहार दिलाए अच्छी पगा
आपका लोक व्यवहार भी इस कार्य में उपयोगी है। आपको यह पता होना चाहिए कि लोगों से किस तरह व्यवहार किया जाए और अपने ग्राहकों का विश्वास किस तरह जीता जाए। यदि ग्राहक गुस्से में है तो चतुराई से व्यवहार कर उसका गुस्सा शांत किया जाए और बातचीत करमसले का हल निकाला जाना चाहिए। आपको सोचना चाहिए कि आप अपने देश के सांस्कृतिक राजदूत हैं। हमें सामने वाले देश की संस्कृति के अनुरूप करना चाहिए साथ ही अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। शालीन व्यवहार हमेशा लाभकारी होता है।

नैतिकता का उल्लंघन न करे
कभी भी नैतिकता का उल्लंघन न करें। उदाहरण के लिए किसी आयातकर्ता के लिए अनुवाद करते समय उसका भारतीय सहकर्मी यह जानना चाहेगा कि दूसरे लोग इस कार्य का कितना पैसा देते हैं। अपने ग्राहक की जानकारी के बिना इस तरह की जानकारी देना उचित नहीं है। ऐसीस्थिति में सीधे-धीरे इंकार करने के बजाए यह कह सकते हैं कि हमने डॉलर में दाम दिए हैं और ग्राहक को इसकी जानकारी है इसलिए उसने हमें जानकारी नहीं दी है।

अच्छी शक्ल भी जरूरी ह
आजकल आपके ग्राहक चाहते हैं कि दुभाषिए दिखने में भी अच्छा हो। यह जरूरी नहीं कि आप फिल्मी नायक या नायिका की तरह दिखाई दें, लेकिन आपको स्मार्ट दिखार्ई देना चाहिए तथा परिधान भी उसी के अनुरूप होना चाहिए। पटेल द्वारा अँगरेजी, चीनी, डच, फ्रेंच, जर्मन, इटालियन, स्पेनिश, रूसी, पोलिश, जापानी, हिन्दी, गुजराती, मराठी, बंगाली, तमिल, कन्नड़ और पंजाबी भाषाओं में अनुवाद कार्य कराया जाता है।

सामान्यतः एक व्यक्ति द्वारा अनुवाद तथा दूसरे व्यक्ति द्वारा उसका संपादन किया जाता है। संपादक हमेशा पहले अनुवाद और उसके बाद मूल पाठ पढ़ता है। पेशेवर अनुवादक या दुभाषिए का काम एक कठिन काम है जिसके लिए गंभीरता तथा उच्चस्तरीय प्रतिबद्धता जरूरी है। याद रहे, यदि आप अनुवाद कला में माहिर हैं तो इसका मतलब यह है कि आप घर बैठे रोजाना 20 हजार रु. तक कमा सकते हैं।

चुनें कौन-सी भाष
अब से कई दशक पूर्व सारी दुनिया के व्यापार में अँगरेजी भाषा ने जो वर्चस्व स्थापित किया था, वह आज भी बरकरार है। दुनिया भर के बिजनेस एक्जीक्यूटिव अँगरेजी को ही अपनाकर अपना व्यापार आगे बढ़ा रहे हैं लेकिन अब चीन, जापान और भारत जैसी एशियाई कंपनियाँ व्यापार जगत में अपना दबदबा कायम कर रहे हैं, यह स्थिति तेजी से बदल रही है।

वैश्वीकरण के साथ जीवन के हर क्षेत्र में इंटरनेट को अपनाए जाने से यह बदलाव और तेज होगा। यदि इंटरनेट उपयोग करने वालों के आँकड़ों पर निगाहें डाली जाएँ तो पता चलता है कि माँग 43 प्रश उपभोक्ताओं द्वारा सूचना प्राप्ति के लिए अँगरेजी की माँग की गई है, शेष भाषाओं की स्थिति निम्नानुसार है-

अँगरेजी 43 प्रश, जर्मन 6.8 प्रश, इटालियन 3.8 प्रश, फ्रेंच 3.3 प्रश, स्पेनिश 6.5 प्रश, चीनी 8.8 प्रश, जापानी 8.9 प्रश, कोरियाई 4.6 प्रश, पुर्तगाली 2.6 प्रश, डच 2 प्रश, रूसी 2 प्रश, अन्य 7.4 प्रश

वैश्वीकरण से एशियाई देशों के बढ़ते कदम और वर्चस्व को देखकर यही लगता है कि इस सदी में इंटरनेट तथा व्यवसाय संप्रेषण में सामान्यतः सीजेके (चीनी, जापानी और कोरियाई) तथा एफआईजीएस (फ्रेंच, इटालियन, जर्मन, स्पेनिश) का वर्चस्व रहेगा। इस लिहाज से इस क्षेत्र मेंकरियर बनाने वालों को इन भाषाओं के बढ़ते महत्व को देखते हुए भाषाएँ सीखनी चाहिए।
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